डीएम साहब, सुधार दें शहर की सड़कें, दिला दें एप्रोच पथ

Published at :04 May 2018 6:24 AM (IST)
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डीएम साहब, सुधार दें शहर की सड़कें, दिला दें एप्रोच पथ

जाम बनी है समस्या, अतिक्रमण की चपेट में शहर, शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे मुंगेरवासी मुंगेर : मुंगेर के जिलाधिकारी के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी आनंद शर्मा ने पदभार ग्रहण किया है. मुंगेर के लोगों को इनसे बड़ी उम्मीदें हैं. क्योंकि मुंगेर विकास की दौर में कई स्तर पर पिछड़ […]

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जाम बनी है समस्या, अतिक्रमण की चपेट में शहर, शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे मुंगेरवासी

मुंगेर : मुंगेर के जिलाधिकारी के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी आनंद शर्मा ने पदभार ग्रहण किया है. मुंगेर के लोगों को इनसे बड़ी उम्मीदें हैं. क्योंकि मुंगेर विकास की दौर में कई स्तर पर पिछड़ चुका है और यहां अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है. डीएम आनंद शर्मा ने भी एक जिलाधिकारी के रूप में जो कुछ करने का सपना संजोया होगा, उसे मुंगेर में ही मूर्त रूप देने का अवसर मिला है. क्योंकि डीएम के रूप में मुंगेर उनकी पहली पोस्टिंग है. उनके कंधों पर जहां मुंगेर के विकास व लॉ ऑर्डर की महती जिम्मेदारी है. वहीं इस शहर की आधी दर्जन ऐसी समस्याएं हैं. जिसका निदान यदि हो जाये, तो शहरवासी ऋणी रहेंगे. चाहे वह गंगा पुल के एप्रोच पथ की भूमि अधिग्रहण का मामला हो अथवा शहर में अतिक्रमण व ट्रैफिक की समस्या. आम लोगों को यह उम्मीद है कि वे इन समस्याओं से शहरवासियों को निजात दिलायेंगे.
एप्रोच पथ जमीन अधिग्रहण में तेजी लाना जरूरी
मुंगेर में गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल का शिलान्यास वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. 14 वर्षों बाद गंगा रेल सह सड़क पुल तैयार हो गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण भी कर दिया. ट्रेनों का आवागमन तो प्रारंभ हो गया. किंतु अब भी सड़क यातायात प्रारंभ नहीं हो पाया. पुल तो बन कर तैयार है. लेकिन एप्रोच पथ नहीं बना है. बदहाली यह है कि 16 वर्ष में मुंगेर जिला प्रशासन ने एप्रोच पथ के लिए अब तक भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण नहीं किया है. जब तक भूमि अधिग्रहण नहीं होगा. तब तक सड़क का निर्माण भी नहीं हो सकता. मुंगेर के लोगों को उम्मीद है कि नये जिलाधिकारी भू अधिग्रहण का कार्य तीव्र गति से संपन्न करायेंगे. ताकि गंगा पुल का एप्रोच पथ बन सके और लोग इस पुल का लाभ उठा सके. यह सर्वविदित है कि गंगा सड़क पुल चालू होने से विकास के दौर में मुंगेर शामिल हो जायेगा.
मुंगेर एक खूबसूरत शहर है. ऐतिहासिकता के साथ ही इस शहर की बनावट ऐसी है जो आम लोगों को आकर्षित करती है. सन 1934 के विनाशकारी भूकंप के बाद नये टाउनशिप के आधार पर इस शहर को बसाया गया. चौड़ी सड़कें, हर 50 गज की दूरी पर एक चौराहा, बेहतर फुटपाथ के साथ ही जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था. लेकिन मुंगेर की खूबसूरती को अतिक्रमण की नजर लग गयी है. अतिक्रमण के कारण चौड़ी सड़कें गली बन चुका है, फुटपाथ का नामो निशान मिट गया है
और सड़कों पर चलने में वाहनों के साथ ही आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. शहर को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए कई बार अभियान चले. कुछ दिनों तक चौड़ी सड़कें व खाली फुटपाथ नजर भी आये. किंतु वह कुछ ही दिनों में पुन: अपने स्वरूप में आ जाता है. इस शहर के लोग वर्षों से अतिक्रमण मुक्त सड़क चाह रहे हैं. जो न सिर्फ शहर को खूबसूरती प्रदान करेगा. बल्कि ट्रैफिक की समस्या से भी निजात मिलेगी.
मुंगेर शहर इन दिनों जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. एक नंबर ट्रैफिक पटेल चौक, कस्तूरबा वाटर वर्क्स चौक, कौड़ा मैदान, बाटा चौक, बेकापुर पसरट्टा पट्टी, राजीव गांधी चौक, गुलजार पोखर, कोतवाली चौक, नीलम चौक पर जाम की गंभीर समस्या बनी रहती है. कहने को तो इन स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस भी तैनात रहते हैं. लेकिन कोई बगल के दुकान पर मोबाइल पर गेम खेलते नजर आते तो कोई अपने सहकर्मी के साथ गप्पे मारते. फलत: इन स्थानों पर जाम के कारण प्रतिदिन लोग परेशान होते हैं. इतना ही नहीं शहर के दर्जन भर स्थानों पर ऑटो व टोटो वालों ने अवैध वाहन स्टैंड बना रखा है जो शहर के यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. यदि इस व्यवस्था को व्यवस्थित कर दिया जाये तो शहरवासियों को काफी सुविधा होगी और ट्रैफिक की भी समस्या नहीं रहेगी.
मुंगेर शहर के एक मात्र अति प्राचीन जिला स्कूल के पास ही अपना खेल का मैदान है. लेकिन वर्षों से इस मैदान पर कब्जा है. बच्चे खेलने के लिए इधर-उधर भटकते रहते और उसके मैदान का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा. किंतु इसका लाभ जिला स्कूल को भी नहीं हो रहा. एक राजनीति साजिश के तहत मुंगेर सब्जी मंडी को महज कुछ दिनों के लिए खेल के मैदान में जगह दिया गया था. किंतु वर्षों वर्ष बीतता जा रहा, न तो सब्जी मंडी को वहां से हटाया जा रहा और न ही बच्चों को खेल मैदान लौटाया जा रहा. छात्रों को उम्मीद है कि नये डीएम साहब इसका कोई निदान करेंगे और उन्हें उनका खेल मैदान वापस मिलेगा.
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