Motihari: 30 साल से मुस्लिम भाई को राखी बांध रही हिंदू बहन, रक्सौल में भाईचारे की मिसाल

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बहन इंदु सोनी से राखी बांधवाते मुस्लिम भाई समसुद्दीन | Prabhat Khabar Network

रक्सौल में एक मुस्लिम भाई को उनकी हिंदू बहन पिछले 30 सालों से लगातार रक्षाबंधन पर राखी बांधती आ रही हैं. यह रिश्ता मजहब से परे प्रेम, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का अद्भुत उदाहरण पेश करता है.

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Motihari News: कुछ रिश्ते मजहब और सामाजिक सीमाओं से परे होते हैं. रक्सौल में समसुद्दीन आलम और उनकी बहन अंजली कुमारी उर्फ इंदु सोनी का रिश्ता इसकी खूबसूरत मिसाल है. मुस्लिम समुदाय से आने वाले समसुद्दीन को उनकी हिंदू बहन इंदु पिछले करीब 30 वर्षों से हर रक्षाबंधन पर राखी बांधती आ रही हैं. दोनों का यह रिश्ता सामाजिक सौहार्द, प्रेम और भाईचारे का संदेश दे रहा है.

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बचपन से बहन का मिला स्नेह

समसुद्दीन आलम बताते हैं कि बचपन से ही उनकी दीदी इंदु उनका बहुत ख्याल रखती थीं. घर या स्कूल में उनसे कोई गलती हो जाती थी तो बहन हमेशा उन्हें बचाने के लिए आगे रहती थीं.

समसुद्दीन कहते हैं कि बहन की शादी का दिन आज भी उन्हें भावुक कर देता है. विदाई के समय दोनों भाई-बहन खूब रोए थे. समय बीतने के साथ जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन दोनों के बीच स्नेह और अपनापन आज भी उसी तरह कायम है.

30 साल बाद भी भाई में दिखता है वही नटखट बच्चा

इंदु कुमारी उर्फ इंदु सोनी बताती हैं कि करीब तीन दशक बीत जाने के बाद भी समसुद्दीन उन्हें आज भी पांच साल का वही नटखट बच्चा नजर आते हैं.

वह कहती हैं कि हर रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधते समय मन में वही पुराना स्नेह और अपनापन रहता है. उनके लिए यह रिश्ता केवल भाई-बहन का नहीं, बल्कि वर्षों से कायम विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है.

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित हो चुकी हैं इंदु

इंदु सोनी शिक्षिका हैं और उन्हें देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित होने का गौरव भी प्राप्त है. उनका कहना है कि समाज में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें मनभेद में नहीं बदलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि लोगों को बांटने के बजाय जोड़ने की जरूरत है. प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान से ही समाज में सौहार्द का वातावरण कायम रह सकता है.

रक्षाबंधन के संदेश को मजबूत करता है यह रिश्ता

समसुद्दीन और इंदु का करीब 30 वर्षों से चला आ रहा यह रिश्ता रक्षाबंधन के मूल संदेश को और मजबूत करता है. अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के बावजूद दोनों के बीच भाई-बहन का रिश्ता विश्वास और आत्मीयता पर टिका है.

रक्सौल की यह कहानी बताती है कि रिश्तों की मजबूती मजहब की सीमाओं से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और अपनत्व से तय होती है. यही वजह है कि समसुद्दीन और इंदु की कहानी इलाके में सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल बनी हुई है.

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