ग्राउंड रिपोर्ट: मोतिहारी के आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली, न वजन मशीन न बच्चों की मॉनिटरिंग, ढर्रे पर व्यवस्था

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आंगनबाड़ी केंद्र (सांकेतिक तस्वीर)

पूर्वी चंपारण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग का आंकड़ा चिंताजनक है. चार अगस्त तक 63.64 फीसदी बच्चों की नियमित माप नहीं हो सकी थी. वहीं पोषण ट्रैकर के जुलाई आंकड़ों में 37 फीसदी बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित मिले.

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पूर्वी चंपारण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है. पोषण ट्रैकर के जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 37 फीसदी बच्चे बौनेपन यानी स्टंटिंग से प्रभावित हैं. राज्य में यह आंकड़ा 38 फीसदी है. चिंता की बात यह है कि बच्चों की नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए जरूरी वजन और लंबाई मापने की व्यवस्था भी कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर सवालों के घेरे में है.

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अधिकांश केंद्रों पर वजन मापने वाली मशीन नहीं

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास की निगरानी के लिए वजन और लंबाई की नियमित माप जरूरी होती है. इसके लिए केंद्रों को विकास निगरानी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं. इनमें बच्चों का वजन मापने वाली मशीन और लंबाई मापने के उपकरण शामिल हैं.

लेकिन जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों से वजन मापने वाला यंत्र गायब होने की बात सामने आ रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना जरूरी उपकरणों के बच्चों का वजन और शारीरिक विकास नियमित रूप से कैसे मापा जा रहा है.

4.37 लाख बच्चों में सिर्फ 1.59 लाख की मॉनिटरिंग

जिले में ग्रोथ मॉनिटरिंग की स्थिति भी चिंताजनक है. चार अगस्त 2026 तक पूर्वी चंपारण की 28 बाल विकास परियोजनाओं में कुल 4,37,484 सक्रिय बच्चे दर्ज थे. इनमें से सिर्फ 1,59,077 बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग हो सकी थी.

यानी करीब 63.64 फीसदी बच्चे नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग से वंचित रह गए. आंकड़ों के मुताबिक कुल सक्रिय बच्चों में लगभग 36.36 फीसदी बच्चों की ही उस तारीख तक ग्रोथ मॉनिटरिंग हो सकी थी.

वजन और लंबाई से मिलती है कुपोषण की जानकारी

ग्रोथ मॉनिटरिंग के दौरान बच्चों का वजन और लंबाई मापकर उसका रिकॉर्ड पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है. इससे बच्चों के शारीरिक विकास की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है.

नियमित माप के जरिए सामान्य बच्चों के साथ कम वजन, कुपोषण और स्टंटिंग से प्रभावित बच्चों की पहचान की जा सकती है. समय पर ऐसे बच्चों की पहचान होने से उन्हें जरूरत के अनुसार पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है.

स्टंटिंग का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला

पोषण ट्रैकर के जुलाई 2026 के आंकड़ों में पूर्वी चंपारण के 37 फीसदी बच्चों के स्टंटिंग से प्रभावित होने की बात सामने आई है. राज्य का औसत 38 फीसदी है. ऐसे में जिले में बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग को लेकर सामने आया आंकड़ा महत्वपूर्ण हो जाता है.

जब बड़ी संख्या में बच्चों की नियमित माप ही नहीं हो पा रही है, तब उनके पोषण और विकास से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान करना चुनौती बन सकता है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था को प्रभावी बनाना ऐसे में अहम माना जा रहा है.

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