सीसी की राशि लेकर धान खरीद नहीं करने वाले दो पैक्स अध्यक्षों पर प्राथमिकी दर्ज
जिला सहकारिता कार्यालय मधुबनी | Prabhat Khabar Network
लाखों रुपये का सीसी ऋण लेकर भी धान खरीद में रुचि नहीं दिखाने वाले दो पैक्स पर सहकारिता विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है. दोनों पैक्सों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज कर प्राथमिकी कराई गई है, और उन्हें काली सूची में डाल दिया गया है.
PACS rice procurement fraud: मधुबनी जिले में धान खरीद के लिए बैंक से सीसी ऋण की राशि लेने के बावजूद धान खरीद में रुचि नहीं दिखाने और बैंक का पैसा वापस नहीं करने वाले दो पैक्स पर सहकारिता विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है. जिला सहकारिता पदाधिकारी सुदर्शन कुमार ने बताया कि वर्ष 2025-26 में धान खरीद के लिए लखनौर प्रखंड के गंगापुर पैक्स और राजनगर प्रखंड के सीबीपट्टी पैक्स को 1 करोड़ 64 लाख रुपये का सीसी दिया गया था.
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Madhubani News: 1 करोड़ 64 लाख रुपये का लिया गया था सीसी ऋण
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीद प्रक्रिया को गति देने के लिए सहकारिता विभाग द्वारा बैंकों के माध्यम से पैक्सों को कैश क्रेडिट (सीसी) ऋण उपलब्ध कराया गया था. लखनौर के गंगापुर पैक्स को 1 करोड़ 35 लाख 64 हजार रुपये दिए गए थे, जबकि सीबीपट्टी पैक्स को भी राशि आवंटित की गई थी. हालांकि दोनों पैक्सों ने अंतिम समय तक धान खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई.
नोटिस का जवाब न देने पर विभाग की कड़ी कार्रवाई
बैंक की राशि जमा करने के लिए जब पैक्स अध्यक्षों को कहा गया तो उनकी तरफ से कोई भी सार्थक जवाब नहीं दिया गया. विभाग के लगातार पत्र लिखने और चेतावनियों के बावजूद जब पैसे वापस नहीं किए गए, तब सहकारिता विभाग ने इसे राशि गबन मानते हुए दोनों पैक्सों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी है. साथ ही दोनों को काली सूची में भी डाल दिया गया है.
दोनों पैक्सों पर 10 लौट से अधिक धान बकाया
सहकारिता विभाग के आंकड़ों के अनुसार गंगापुर पैक्स को मिले ऋण के एवज में 7.30 एमटी और सीबीपट्टी पैक्स पर 2.93 लौट धान बकाया है. ध्यातव्य है कि धान खरीद का एक लौट 433 क्विंटल का होता है. पैक्स अध्यक्ष बिना धान खरीदे ही लाखों रुपये की सरकारी राशि लेकर घर बैठ गए, जिसके बाद प्रशासन ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.
भविष्य की धान खरीद व्यवस्था पर प्रशासन की पैनी नजर
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिला सहकारिता प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी राशि और किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा. जिला सहकारिता पदाधिकारी सुदर्शन कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितता बरतने वाले अन्य संस्थानों की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में धान खरीद में पारदर्शिता बनी रहे.
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