सदा उचित कार्य करने वाला व्यक्तित्व ही राम के समान है: स्वामी सुकर्मानंद

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प्रभु श्री राम का जीवन चरित्र समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा का स्रोत है

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श्रीरामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का दूसरा दिन- प्रतिनिधि, बिहारीगंज बिहारीगंज के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के क्रीड़ा स्थल पर आयोजित पांच दिवसीय रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रोताओं को कहा. उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच कहा कि माध्यम से आप जान पाएंगे कि राम चरित मानस क्या है. यह आप सभी आज के ज्ञान यज्ञ में जान पायेंगे. श्रीरामचरितमानस सिर्फ़ दोहा चौपाई श्लोक का मिश्रण मात्र ही नहीं है. यह हमारी भारतीय संस्कृति के आधार का स्तंभ है. प्रभु श्री राम का जीवन चरित्र समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा का स्रोत है. हम सभी जिस शब्द को उचारते हैं वह है राम. राम का ही तो विस्तार है राइट एक्क्शन मैन. इस सुपरिभाषित शब्द का आशय है, सदा उचित कृत्यों को करने वाला व्यक्तित्व. जो सतगुणो से परिपूर्ण प्रभु राम का अनुसरण करके ही श्रेष्ठता को छू सकता है. ऐसा करना अव्यावहारिक नहीं. वास्तविकता यह है कि राम के चरित्र को धारण कर हर क्षेत्र में सफलता को प्राप्त किया जा सकता है. चाहे वह लक्ष्य गगन समान ऊंचाई पर ही क्यों न हो. वास्तव में प्रभु श्री राम हमें जीवन जीने की कला को समझाते हैं और वह भी सिर्फ अयोध्यावासी को ही नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति को. श्रीरामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ के पांच दिवसीय महाउत्सव में दूसरे दिन स्वामी सुकर्मानन्द ने कहा कि प्रभु श्रीराम कहतें हैं कि सृष्टि का रचियता मैं ही हूं. मैं सभी प्राणियों से प्रेम करता हूं, परंतु सबसे अधिक मुझे मनुष्य ही क्यों प्रिय है. श्रीरामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन रविवार का अवकाश होने से पंडाल में श्रद्धालुओं तथा श्रोताओं की अच्छी संख्या मौजूद थी.

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