राष्ट्रीय लोक अदालत में 5890 मामलों की सुनवाई, 1032 का निपटारा, 8.98 करोड़ की सेटलमेंट राशि तय, 10 बेंच गठित
संबोधित करते प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश. | Prabhat Khabar Network
जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1032 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया. आपसी सहमति से सुलझाए गए इन मामलों में 8.98 करोड़ रुपये से अधिक की सेटलमेंट राशि तय हुई. यह आयोजन समय, धन और मेहनत की बचत करने का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसका शुभारंभ प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव पूजा कुमारी साह, डीडीसी अरुण कुमार और जिला अधिवक्ता संघ के सचिव गणेश कुमार ने दीप जलाकर किया.
आपसी सहमति से विवाद सुलझाने पर जोर
मौके पर प्रभारी प्रधान जिला जज सतीश कुमार ने कहा कि लोक अदालत में विवादों का जल्दी और स्थायी समाधान किया जाता है. आपसी सहमति और सुलह के आधार पर मामलों का निपटारा इसका सबसे बड़ा फायदा है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत में बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान के मामलों का भी निपटारा किया जा रहा है.
समय और पैसे दोनों की होती है बचत
उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण माहौल में अपने मामलों का निपटारा कराने की अपील की. कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामले सुलझाने पर समय और मेहनत के साथ पैसे की भी बचत होती है. इससे लोगों को राहत मिलने के साथ सामाजिक विकास में भी मदद मिलती है.
1032 मामलों का हुआ निपटारा
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 5890 मामलों को निपटारे के लिए चिन्हित किया गया था. इनमें पुराने आपराधिक मामलों की संख्या 4297 थी, जिनमें 660 मामलों का निपटारा हुआ. वहीं बैंक रिकवरी के 2421 मामलों में 425 मामलों का निष्पादन किया गया. इस तरह कुल 1032 मामलों का निपटारा किया गया. इन मामलों में कुल 8 करोड़ 98 लाख 27 हजार 947 रुपये की सेटलमेंट राशि रही.
दस बेंचों पर हुई मामलों की सुनवाई
लोक अदालत के लिए कुल दस बेंच बनायी गयी थीं. पहली बेंच पर प्रभारी जिला जज सतीश कुमार और अधिवक्ता अर्जुन कुमार ने एमएसीटी, पारिवारिक, उपभोक्ता, मुंसिफ के सिविल वाद और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक से जुड़े मामलों की सुनवाई की.
दूसरी बेंच पर न्यायाधीश रघुवीर प्रसाद और अधिवक्ता सुचिन्द्र कुमार सिंह ने आपराधिक सुलहनीय और विद्युत मामलों की सुनवाई की. तीसरी बेंच पर सीजेएम नूतन कुमारी और अधिवक्ता निशांत कुमार ने सीजेएम के सुलहनीय मामलों को देखा.
चौथी बेंच पर एसीजेएम योगेश कुमार मिश्रा और अधिवक्ता संगीत झा ने ट्रैफिक चालान के मामलों की सुनवाई की. पांचवीं बेंच पर एसीजेएम शोभा और अधिवक्ता नलिन चंद्र ने एसीजेएम तृतीय और प्रथम के सुलहनीय मामलों का निपटारा किया.
छठी बेंच पर एसीजेएम विकास कुमार और अधिवक्ता बबलू कुमार ने दूरसंचार, बीएसएस, उत्कर्ष, मुथूट, आरबीएल, बंधन, सेंट्रल बैंक समेत अन्य बैंक के मामलों की सुनवाई की. सातवीं बेंच पर एसीजेएम शोभना श्वेतांकी और अधिवक्ता कन्हैया कुमार ने धारा 107/144, दाखिल-खारिज, बैंक, श्रम, पानी बिल, नीलाम पत्र, मापतौल और खनिज से जुड़े मामलों को देखा.
आठवीं बेंच पर एसडीजेएम आशुतोष अभिमन्यु और अधिवक्ता अरुण कुमार ने एसडीजेएम वाद, एसबीआई और इंडियन बैंक के मामलों की सुनवाई की. नौवीं बेंच पर जेएम शशांक कुमार और अधिवक्ता आलोक सिन्हा तथा दसवीं बेंच पर जेएम अभिनव राज और अधिवक्ता अमरेंद्र झा ने मामलों की सुनवाई की.
सहायता केंद्रों पर भी रही व्यवस्था
लोक अदालत परिसर में दो सहायता केंद्र बनाये गये थे. सहायता केंद्र-1 में हेमंत कुमार, सुमित, वीरेंद्र और गौतम तथा सहायता केंद्र-2 में गौरव, शंकर और दीपक ने लोगों की मदद की.
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