सरकारी स्कूलों में कब शुरू होगी नाटक की पढ़ाई? NSD शाखा की पहल के बीच रंगकर्मियों ने उठाई शिक्षक नियुक्ति की मांग

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डिग्रीधारी सुनीत साना | Prabhat Khabar Network

बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की शाखा खुलने की पहल के बीच, रंगकर्मी सरकारी स्कूलों में नाटक शिक्षकों की नियुक्ति की पुरजोर मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि नाटक बच्चों के व्यक्तित्व विकास और अभिव्यक्ति क्षमता को बेहतर बनाता है, इसलिए इसे स्कूली शिक्षा का नियमित हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

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Drama Teacher Recruitment Bihar: बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की शाखा खोलने की पहल के बीच सरकारी स्कूलों में नाटक की पढ़ाई को लेकर भी आवाज तेज होने लगी है. रंगकर्मियों ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में नाटक शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई है. उनका कहना है कि एक ओर बिहार में नाट्य शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल हो रही है, वहीं दूसरी ओर नाटक विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त सैकड़ों युवा वर्षों से रोजगार के अवसर का इंतजार कर रहे हैं.

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रंगकर्मियों का कहना है कि नाटक और नाट्यकला में स्नातकोत्तर तथा प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के अनुरूप सरकारी स्कूलों में अवसर मिलना चाहिए. इसके लिए एसटीईटी-2026 में नाटक या नाट्यकला विषय को शामिल करने की मांग की गयी है. साथ ही सरकारी विद्यालयों में नाटक शिक्षक के पद सृजित कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी तेज की गयी है.

रंगकर्मियों के अनुसार बिहार में नाट्य शिक्षा कोई नई बात नहीं है. राज्य में लंबे समय से नाटक के क्षेत्र में उच्च शिक्षा की व्यवस्था रही है. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में वर्ष 1985 से नाटक विषय में उच्च शिक्षा दी जा रही है. ऐसे में इस क्षेत्र में पढ़ाई और प्रशिक्षण हासिल कर चुके स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में सरकारी स्तर पर पहल होनी चाहिए.

नाटक को सिर्फ मंच तक सीमित रखने की जरूरत नहीं

रंगकर्मियों का कहना है कि स्कूलों में नाटक को केवल मनोरंजन की गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. नाटक बच्चों के व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम बन सकता है. इसके जरिए बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता विकसित होती है.

नाट्य गतिविधियों से बच्चों की अभिव्यक्ति, रचनात्मक सोच और संवाद कौशल को भी मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों और पात्रों को समझने की प्रक्रिया बच्चों में सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने में मदद कर सकती है. यही वजह है कि रंगकर्मी चाहते हैं कि नाटक को स्कूली शिक्षा का नियमित हिस्सा बनाया जाए.

Drama Teacher Recruitment Bihar: NSD शाखा की पहल से जगी नई उम्मीद

बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की शाखा खोलने की पहल को रंगकर्मियों ने सकारात्मक कदम बताया है. उनका मानना है कि इससे राज्य में नाट्य शिक्षा और रंगमंच को नई दिशा मिल सकती है. लेकिन इसके साथ स्कूली स्तर पर नाटक की पढ़ाई और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति पर भी ध्यान देना जरूरी है.

रंगकर्मियों की मांग अब इस बात पर केंद्रित है कि एसटीईटी-2026 में नाटक विषय को जगह मिले और सरकारी विद्यालयों में इसके लिए शिक्षक पद सृजित किए जाएं. इससे नाट्य शिक्षा को स्कूली स्तर पर बढ़ावा मिलने के साथ वर्षों से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकता है.

फिलहाल रंगकर्मियों ने सरकार से नाटक विषय को शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल करने और प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को मौका देने की मांग की है. अब देखना होगा कि नाट्य शिक्षा को लेकर उठी यह मांग सरकारी स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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