मधेपुरा: बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में 'स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम' का समापन, प्रो. डॉ. मधेपुरी बोले- 'जहां ध्यान है, वहीं खोज है'
व्याख्यान के मौके पर सम्मानित होते डॉ मधेपुरी | Prabhat Khabar Network
बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में 12 दिवसीय 'स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम' का सफल समापन हुआ. शिक्षाविद प्रो. डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने नवागंतुक विद्यार्थियों को जीवन में नवाचार, ध्यान, अनुशासन और सकारात्मक सोच के महत्व पर मार्गदर्शन दिया.
मधेपुरा स्थित बीपी मंडल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में 10 अगस्त से 22 अगस्त 2026 तक संचालित 12 दिवसीय 'स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम' (एसआईपी-2026) का शनिवार को गरिमामय समापन हुआ. समापन सत्र में प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो. डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे. प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. अरविंद कुमार अमर के निमंत्रण पर आयोजित 'एक्सपर्ट टॉक' में डॉ. मधेपुरी ने नवागंतुक विद्यार्थियों को जीवन में नवाचार, ध्यान, अनुशासन और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया.
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बहुआयामी विकास के लिए 12 दिनों तक चले विशेष सत्र
बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में सत्र 2026-30 के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को कैंपस के माहौल और इंजीनियरिंग की बारीकियों से परिचित कराने के लिए इस इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया था.
इस दौरान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पर्सनालिटी डेवलपमेंट, करियर अपॉर्चुनिटी, म्यूजिकल व स्पोर्ट्स एक्टिविटीज, एंटी-रैगिंग प्रावधान और हॉस्टल अनुशासन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए.
'जहां ध्यान है, वहीं खोज है': प्रो. डॉ. मधेपुरी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि पहले कहा जाता था कि 'आवश्यकता आविष्कार की जननी है', लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक युग में सच यह है कि 'जहां ध्यान है, वहीं खोज है.'
- वैज्ञानिक उदाहरण: उन्होंने पहिये (चक्के) के आविष्कार, आइजक न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण और गति के नियमों, 'न्यूटन लॉ ऑफ कूलिंग' तथा भारत के महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन के 'रमन इफेक्ट' का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को समझाया कि एकाग्रता और जिज्ञासा ही महान खोजों का आधार बनती हैं.
- इतिहास और शिक्षा: उन्होंने कहा कि अतीत को जाने बिना स्वर्णिम भविष्य नहीं गढ़ा जा सकता. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि मधेपुरा को वर्ष 1845 में अनुमंडल बनने के 50 साल बाद 1896 में पहला प्राइमरी स्कूल मिला, जो आज शिवनंदन प्रसाद मंडल +2 विद्यालय के रूप में स्थापित है.
- संघर्ष का संदेश: उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि संघर्ष ही जीवन है. इंजीनियर बनने के बाद भी संघर्ष का दौर समाप्त नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं. व्यक्ति को युगों-युगों तक केवल उसके सत्कर्म ही जीवित रखते हैं.
कैंपस अनुशासन और दायित्वों पर जोर
समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. अरविंद कुमार अमर ने सभी नवागंतुक छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए संस्थान के नियमों और कैंपस अनुशासन का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया.
उन्होंने सभी सत्र समन्वयकों, शिक्षकों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा छात्रों को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए शुभकामनाएं दीं.
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