मधेपुरा: 'सेवा संकल्प' के तहत तीन दिवसीय आंगन मिलन का समापन, केंद्रों पर हुई गर्भवती महिलाओं की गोदभराई
गोद भराई करते | Prabhat Khabar Network
आंगनबाड़ी केंद्रों पर 'आंगन मिलन' कार्यक्रम का समापन हुआ. गर्भवती महिलाओं की गोदभराई, सुरक्षित मातृत्व और उत्तम पोषण के महत्व पर विशेष जोर दिया गया.
सेवा संकल्प अभियान के तहत समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) द्वारा जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित तीन दिवसीय 'आंगन मिलन' कार्यक्रम का गुरुवार को विधिवत समापन हो गया. कार्यक्रम के अंतिम दिन जिले के सभी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की पारंपरिक रीति-रिवाज से गोदभराई की गई और उन्हें सुरक्षित मातृत्व, उत्तम पोषण व स्वस्थ शिशु के विकास के प्रति जागरूक किया गया.
समारोह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर नवप्रवेशी बच्चों एवं उनके अभिभावकों का स्वागत व परिचय सत्र आयोजित हुआ. बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए बालगीत, प्रेरक कहानियां, रोल-प्ले, चित्रांकन एवं रंग भरने जैसी रचनात्मक गतिविधियां कराई गईं. साथ ही उपस्थित महिलाओं को समय पर टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, संतुलित आहार और आईसीडीएस की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई.
मुरलीगंज में डीपीओ ने गर्भवती महिला को सौंपी 'पोषण टोकरी'
इसी क्रम में बाल विकास परियोजना मुरलीगंज अंतर्गत परवा नवटोल पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 77 पर आयोजित विशेष आंगन मिलन कार्यक्रम में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (DPO) सीमा कुमारी मुख्य रूप से उपस्थित हुईं. उन्होंने केंद्र पर पहुंचकर एक गर्भवती महिला की पारंपरिक तरीके से गोदभराई की और उपहार स्वरूप 'पोषण टोकरी' (जिसमें मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें व पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल थीं) भेंट कर स्वस्थ मातृत्व की शुभकामनाएं दीं.
"गोदभराई केवल रस्म नहीं, सुरक्षित भविष्य का संकल्प" — डीपीओ
उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सीमा कुमारी ने कहा कि गोदभराई केवल एक पारंपरिक रस्म नहीं है, बल्कि यह गर्भस्थ शिशु और मां के सुरक्षित, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरे समाज का सामूहिक संकल्प है.
उन्होंने कहा कि:
- गर्भावस्था के दौरान मां का शारीरिक स्वास्थ्य, पौष्टिक खान-पान और सकारात्मक मानसिक स्थिति शिशु के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है.
- सभी गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में अपनी नियमित एएनसी (प्रसव पूर्व जांच) अवश्य कराएं.
- चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियों का नियमित सेवन करें तथा अनिवार्य टीके समय पर लगवाएं.
थाली में शामिल करें विविधतापूर्ण व स्थानीय पौष्टिक आहार
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) स्वाति कुमारी ने कहा कि गर्भावस्था में केवल भरपेट भोजन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन में विविधता और पोषण का होना बेहद जरूरी है. उन्होंने स्थानीय स्तर पर सुलभ व सस्ते पौष्टिक विकल्पों जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, सहजन, दालें, दूध व दुग्ध उत्पाद, मौसमी फल और अंडा को दैनिक आहार में प्रमुखता से शामिल करने पर जोर दिया.
इस अवसर पर जिला समन्वयक अंशु कुमारी, लैंगिक विशेषज्ञ राजेश कुमार, महिला पर्यवेक्षिका प्रियंका कुमारी, सेविका श्वेता कुमारी, नीलम कुमारी, अलका कुमारी सहित बड़ी संख्या में पोषण सखी, धात्री व गर्भवती महिलाएं और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे.
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