बिहार के पानी का असली हकदार कौन? फरक्का बैराज को लेकर आरजेडी-जेडीयू आमने-सामने

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लालू यादव

Farakka Barrage Treaty: फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर बिहार में आरजेडी और जेडीयू के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है. लालू यादव ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का नाम लिए बिना उन्हें नौसिखिया कहा है. लालू ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने संसद से लेकर सड़क तक हमेशा फरक्का का विरोध किया था.

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Farakka Barrage Treaty: फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल समझौते को लेकर बिहार की राजनीति फिर गरमा गई है. RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने JDU नेता संजय कुमार झा के बयान पर हमला बोला है. लालू ने संजय झा का नाम लिए बिना उन्हें नौसिखिया बताया और कहा कि फरक्का के मुद्दे पर बोलने से पहले इसका पूरा इतिहास और भूगोल समझना चाहिए.

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लालू यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज के खिलाफ RJD ने संसद से लेकर बिहार सरकार तक हर स्तर पर आवाज उठाई थी.

लालू बोले- पहले ही समझ गए थे बिहार को होगा नुकसान

लालू यादव ने दावा किया कि गंगा नदी पर पश्चिम बंगाल में बनाए गए फरक्का बैराज से बिहार को होने वाले नुकसान की बात उन्होंने काफी पहले समझ ली थी. उनके मुताबिक RJD ने शुरू से ही इस मुद्दे को बिहार के हित से जोड़कर देखा और अलग-अलग मंचों पर फरक्का बैराज का विरोध किया.

नीतीश कुमार पर भी साधा निशाना

लालू यादव ने इस मुद्दे पर नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज को लेकर कभी आवाज नहीं उठाई. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में दूर के असर वाले मुद्दों के बजाय ऐसे फैसलों को ज्यादा महत्व दिया, जिनसे तत्काल राजनीतिक फायदा मिल सके.


संजय झा को दी जल संसाधन विभाग के दस्तावेज पढ़ने की सलाह

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ राजनीति करने वाले नेताओं को फरक्का के मुद्दे पर बयान देने से पहले बिहार के जल संसाधन विभाग की जानकारी देखनी चाहिए. उन्होंने गंगा में पानी की उपलब्धता, बांग्लादेश के साथ हुए समझौते का असर और उस समय बिहार सरकार की ओर से किए गए प्रयासों को समझने की बात कही. लालू ने विभाग में रखे पुराने दस्तावेजों के साथ तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह और केंद्र सरकार के बीच हुए पत्राचार को पढ़ने की भी सलाह दी.

दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है फरक्का संधि

फरक्का को लेकर विवाद की वजह भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुआ जल समझौता है. इस समझौते की अवधि दिसंबर 2026 में खत्म होने वाली है. समझौते की अवधि खत्म होने से पहले बिहार में गंगा के पानी और राज्य की भविष्य की जरूरतों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.

संजय झा ने केंद्र से की थी बड़ी मांग

संजय कुमार झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित अपने एक लेख में केंद्र सरकार से कहा था कि फरक्का जल समझौते को उसके मौजूदा रूप में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि 1996 में समझौता होने के समय बिहार के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला. पिछले करीब तीन दशक के आंकड़ों और अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि इसका असर बिहार के लिए नुकसानदायक रहा है.

2050 तक की जरूरत देखकर बने नई व्यवस्था

संजय झा ने सुझाव दिया था कि समझौते की अवधि खत्म होने के बाद गंगा बेसिन में आने वाले सभी राज्यों की पानी की जरूरत का नए सिरे से वैज्ञानिक आकलन किया जाए. उनका कहना था कि साल 2050 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी के बंटवारे और प्रबंधन की नई व्यवस्था तैयार होनी चाहिए. उन्होंने फरक्का समझौते को बिहार के लंबे समय के जल हितों से जोड़ते हुए केंद्र से ठोस कदम उठाने की मांग की थी.

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फरक्का पर लालू बनाम JDU, आगे और बढ़ सकती है सियासत

संजय झा के बयान के बाद शुरू हुई बहस अब लालू यादव के हमले तक पहुंच गई है. एक तरफ JDU फरक्का समझौते की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, वहीं RJD इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख और नीतीश कुमार की भूमिका को सामने ला रहा है. दिसंबर 2026 में समझौते की अवधि खत्म होने से पहले फरक्का बैराज और बिहार के पानी के हिस्से का मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और गर्म होने की संभावना है.

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