बड़हिया: रेलवे पुल के नीचे बजबजाते नाले का पानी बना नासूर, टाल के दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित

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रेलवे पुल के नीचे नाले के पानी से महिलाओं और स्कूली छात्राओं को हो रही सबसे ज्यादा दिक्कत | Prabhat Khabar Network

लखीसराय के बड़हिया में रेलवे पुल के नीचे भीषण जलजमाव ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. नाले की सफाई न होने से सड़कों पर गंदा पानी जमा है, जिससे आवागमन दूभर हो गया है. गढ़टोला मोहल्ले में संक्रामक रोगों का खतरा मंडरा रहा है, लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

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लखीसराय जिले के बड़हिया प्रखंड मुख्यालय को टाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे पुल के नीचे भीषण जलजमाव ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. नाले की सफाई न होने के कारण बजबजाता गंदा और बदबूदार पानी मुख्य सड़क पर कई दिनों से जमा है. इसके चलते बड़हिया रेलवे स्टेशन, प्रखंड कार्यालय और स्थानीय बाजार आने-जाने वाले हजारों राहगीरों के साथ-साथ समीपवर्ती गढ़टोला मोहल्ले के निवासियों के लिए आवागमन करना नारकीय बन चुका है.

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टाल क्षेत्र की लाइफलाइन है यह सड़क

टाल क्षेत्र के किसानों, विद्यार्थियों और दैनिक मजदूरों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • एकमात्र पक्की सड़क: टाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों को बड़हिया नगर और रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाली यही मुख्य पक्की सड़क (कालीकृत मार्ग) है.
  • हजारों लोगों का दैनिक आवागमन: रोजाना सैकड़ों किसान, दूध विक्रेता, छात्र-छात्राएं और नौकरीपेशा लोग इसी रास्ते से बड़हिया बाजार और स्टेशन पहुंचते हैं.
  • पैदल व बाइक सवारों की आफत: पुल के नीचे घुटनों तक भरे गंदे पानी से होकर पैदल चलने वाली महिलाओं, स्कूली छात्राओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. वाहनों के गुजरने से गंदे पानी के छींटे राहगीरों के कपड़ों और आसपास के मकानों पर पड़ते हैं.
रेलवे पुल के नीचे नाले के पानी से आफत, गढ़टोला में लोगों का जीना मुहाल -जलजमाव से राहगीर परेशान, महिलाओं और स्कूली छात्राओं को हो रही सबसे ज्यादा दिक्कत  | Prabhat Khabar Network
रेलवे पुल के नीचे नाले के पानी से आफत

गढ़टोला मोहल्ले में नारकीय स्थिति: संक्रामक रोगों का खतरा

पुल के ठीक समीप स्थित गढ़टोला मोहल्ले के बाशिंदों की स्थिति बदतर हो चुकी है:

  • घरों की चौखट तक गंदा पानी: नाले का बदबूदार पानी घरों के मुहाने और आंगनों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है.
  • सड़ांध और मच्छरों का प्रकोप: गंदे पानी के लगातार जमा रहने से असहनीय दुर्गंध उठ रही है. साथ ही मच्छरों और कीड़े-मकौड़ों के पनपने से मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियां फैलने की गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है.
  • प्रशासनिक अनदेखी पर आक्रोश: ग्रामीणों का आरोप है कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने और नालों की नियमित उड़ाही न कराए जाने के कारण हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन नगर प्रशासन केवल खानापूर्ति कर छोड़ देता है.

स्थायी नाला निर्माण और नियमित उड़ाही की मांग

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने जिला प्रशासन व स्थानीय नगर निकाय से त्वरित कार्रवाई की मांग की है:

  • सक्शन मशीन से पानी की निकासी: पुल के नीचे जमा गंदे पानी को तत्काल मोटर या सक्शन मशीन लगाकर निकाला जाए.
  • स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था: रेलवे पुल के नीचे दोनों किनारों पर गहरे पक्के नाले का निर्माण कर उसे मुख्य आउटलेट से जोड़ा जाए, ताकि बरसात और नाले का पानी सड़क पर रुकने के बजाय सीधे आगे निकल सके.
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