लखीसराय: सुबह खिली धूप के बाद दोपहर में बिगड़ेगा मौसम, आंधी-तूफान के साथ बारिश के आसार

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बादल के बीच सूर्यदेव | Prabhat Khabar Network

लखीसराय में गुरुवार दोपहर बाद मौसम में अचानक बदलाव आने वाला है. बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र से आंधी-तूफान और भारी बारिश की संभावना है. किसानों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है.

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लखीसराय जिले में गुरुवार की सुबह तेज धूप और साफ आसमान के साथ शुरू जरूर हुई, लेकिन दोपहर बाद मौसम के तेवर तल्ख होने का अनुमान है. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) अभी भी पूरी तरह सक्रिय है, जिसके असर से दक्षिण बिहार के जिलों में गरज-चमक और आंधी-तूफान के साथ सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. विशेष रूप से जिले के चानन प्रखंड और इसके आसपास के इलाकों में 50 प्रतिशत तक बारिश की संभावना जताई गई है. दिन में बारिश से पारे में गिरावट आएगी, जिससे अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है.

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बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर सक्रिय, दोपहर बाद करवट लेगा मौसम

मौसम में अचानक आने वाले बदलाव को लेकर मौसम विभाग ने विस्तृत विश्लेषण दिया है:

  • सुबह धूप, दोपहर में बादल: बुधवार शाम से मौसम साफ रहने और गुरुवार सुबह चटख धूप निकलने के बावजूद दोपहर बाद घने मानसूनी बादलों की वापसी होगी.
  • दक्षिण बिहार में भारी बारिश का अलर्ट: चानन प्रखंड सहित दक्षिण बिहार के दायरे में आने वाले इलाकों में सामान्य से ज्यादा वर्षा दर्ज होने की संभावना है.
  • 50% बारिश की संभावना: वायुमंडल में आर्द्रता उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे दोपहर से शाम के बीच तेज हवा और गरज-चमक के साथ बारिश की प्रबल परिस्थितियां बन रही हैं.

लखीसराय: गुरुवार का संभावित मौसमी पैमाना

मौसम सूचकांक के अनुसार जिले का संभावित तापमान और वायुमंडलीय स्थिति:

मौसमी पैमाना (Parameter)संभावित स्थिति (Forecast)
अधिकतम तापमान30°C
न्यूनतम तापमान26°C
बारिश की संभावना50% (दोपहर बाद तेज बौछारें)
मौसम का रुखआंधी-तूफान व मेघ गर्जन के साथ वर्षा
वातावरण में नमीलगातार बारिश से उच्च आर्द्रता

खेतों में जलजमाव: किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में समस्याएं भी बढ़ रही हैं:

  • धान की फसल को नुकसान का डर: जिले के निचले इलाकों और चानन के खेतों में पानी अत्यधिक भर गया है. जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण लगातार जलजमाव से धान की रोपी गई फसल के गलने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है.
  • रास्तों पर कीचड़ व फिसलन: ग्रामीण संपर्क मार्गों और कस्बों में जगह-जगह कीचड़ फैलने से राहगीरों, बाइक सवारों और स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है.
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