फर्श पर इंतजार, सुविधाएं लाचार! ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

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फर्श पर इंतजार करते यात्री

Thakurganj Railway Station: ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की बदहाली की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहाँ प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त बेंच और वेटिंग रूम न होने के कारण दर्जनों यात्री महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ फर्श पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं.

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ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj Railway Station: रेलवे प्रशासन द्वारा लगातार स्टेशनों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल जुदा है. किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को एक बार फिर यात्री सुविधाओं की बदहाली की वास्तविक और दर्दनाक तस्वीर देखने को मिली. प्लेटफॉर्म पर दर्जनों रेल यात्री अपने भारी-भरकम सामान के साथ कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच फर्श पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करते दिखाई दिए. स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं थी, जिसके कारण बच्चों और बीमार बुजुर्गों को लेकर परिवार प्लेटफॉर्म पर ही समय काटने को विवश नजर आए.

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ट्रेनों की लेट-लतीफी से बढ़ती है आफत, नहीं हैं पर्याप्त बेंच

स्टेशन पर ट्रेनों के परिचालन और बुनियादी ढांचे को लेकर यात्रियों का दर्द छलक उठा, जिसे निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है:

  • ट्रेनों का विलंब परिचालन: यात्रियों का कहना है कि सीमांचल रूट पर ट्रेनों के लेट चलने की स्थिति में उनकी परेशानी कई गुना बढ़ जाती है. घंटों तक ट्रेन की आस में बैठे मुसाफिरों के लिए प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं हैं.
  • प्रतीक्षालय की बदहाली: स्टेशन का वेटिंग रूम (प्रतीक्षालय) छोटा और अव्यवस्थित होने के कारण आम यात्रियों के काम नहीं आ रहा है, जिससे महिलाओं और छोटे बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

सीमांचल का महत्वपूर्ण स्टेशन, फिर भी विकास से कोसों दूर

जनता की आवाज: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ठाकुरगंज स्टेशन सीमांचल क्षेत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक रेलवे स्टेशन है. यहाँ से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग रोजगार, उच्च शिक्षा, दिल्ली-कोलकाता में चिकित्सा और अन्य जरूरी व्यापारिक कार्यों के लिए सफर करते हैं. इसके बावजूद यात्री सुविधाओं के मामले में यह स्टेशन अब भी अपेक्षित विकास की बाट जोह रहा है.

रेल यात्रियों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें

परेशान रेल यात्रियों और दैनिक यात्रियों (डेली पैसेंजर्स) ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के उच्च अधिकारियों से इस दिशा में तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है:

  • अतिरिक्त बेंच और शेड: प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो पर अविलंब अतिरिक्त स्टील बेंचें लगाई जाएं और धूप-बारिश से बचने के लिए शेड का दायरा बढ़ाया जाए.
  • विस्तृत प्रतीक्षालय व पेयजल: आधुनिक और बड़ा वेटिंग हॉल बनाया जाए तथा स्टेशन परिसर में स्वच्छ व ठंडे पेयजल (Water Booths) की पुख्ता व्यवस्था हो.
  • भीड़भाड़ का बेहतर प्रबंधन: त्योहारों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले समय में यात्रियों की सुरक्षा और सुचारू आवागमन के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्टेशन स्टाफ का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए.

विडंबनापूर्ण तस्वीर ने खड़े किए गंभीर सवाल

प्लेटफॉर्म पर अपने सामानों के बीच जमीन पर लाचारी में बैठे यात्री रेलवे के ‘अमृत भारत स्टेशन’ जैसे दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ जाते हैं. आखिर रेल यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कब होगा? क्या ठाकुरगंज स्टेशन केवल ट्रेनों के तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) तक ही सीमित रहेगा, या फिर रेल मंत्रालय यहाँ के आम यात्रियों को एक सम्मानजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव देने की दिशा में कोई ठोस धरातलीय पहल करेगा? आम जनता को अब इस दिशा में रेलवे के त्वरित एक्शन का इंतजार है.

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