शाम से सजी महफिल, आधी रात को हुआ कृष्ण जन्म...भक्ति में डूबा ठाकुरगंज

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रामजानकी मंदिर में सजा दरबार रामजानकी मंदिर में झांकी रामजानकी मंदिर में गीत संगीत का कार्यक्रम | Prabhat Khabar Network

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ठाकुरगंज के जगन्नाथ मंदिर और रामजानकी मंदिर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहे. देर रात तक चले भजन-कीर्तन और कृष्ण जन्म के उल्लास ने पूरे नगर को भक्तिमय कर दिया.

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किशनगंज : शाम ढलते ही ठाकुरगंज के मंदिरों में घंटियों की आवाज गूंजने लगी. श्रद्धालुओं के कदम मंदिरों की ओर बढ़ने लगे और देखते ही देखते पूरा नगर कृष्ण भक्ति में रंग गया. जन्माष्टमी के अवसर पर जगन्नाथ मंदिर और रामजानकी मंदिर में शाम से ही विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए. देर रात तक दोनों मंदिर श्रद्धालुओं से गुलजार रहे.

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रंग-बिरंगी रोशनी से सजे मंदिर, शाम से शुरू हुआ भक्ति का दौर

जन्माष्टमी को लेकर दोनों मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई थीं. आकर्षक सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी से सजे मंदिरों की छटा देखते ही बन रही थी. शाम से ही भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की गई. श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और गीत-संगीत का दौर शुरू हुआ. कृष्ण भक्ति में डूबे श्रद्धालु देर रात तक भजनों में रमते रहे. बच्चों और युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह देखने को मिला.

रामजानकी मंदिर में सजा दरबार  रामजानकी मंदिर में झांकी  रामजानकी मंदिर में गीत संगीत का कार्यक्रम  | Prabhat Khabar Network
रामजानकी मंदिर में सजा दरबार रामजानकी मंदिर में झांकी रामजानकी मंदिर में गीत संगीत का कार्यक्रम | Prabhat Khabar Network

घड़ी की सुई 12 पर पहुंची तो गूंज उठा ‘जय कन्हैया लाल की’

हालांकि श्रद्धालुओं के उत्साह का सबसे बड़ा केंद्र आधी रात का वह पल था, जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ. जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां रात 12 बजे की ओर बढ़ रही थीं, श्रद्धालुओं की नजरें जन्म की घड़ी पर टिकी थीं.

मध्यरात्रि होते ही मंदिर परिसर शंख और घंटियों की आवाज से गूंज उठा. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही श्रद्धालुओं ने जोरदार जयकारे लगाए. ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.

बाल स्वरूप के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

कृष्ण जन्म के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए और विशेष आरती में शामिल हुए. आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और उत्साह साफ नजर आया.

देर रात तक दोनों मंदिरों में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा. जन्माष्टमी का यह आयोजन सिर्फ धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे नगर को एक साथ जोड़ने वाला उत्सव बन गया. भक्ति, उल्लास और कृष्ण नाम के जयकारों के बीच ठाकुरगंज में जन्माष्टमी का पर्व यादगार माहौल के साथ संपन्न हुआ.

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