गलगलिया स्टेशन की बदलेगी तस्वीर, डी-क्लास से बी-क्लास बनाने की तैयारी

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गलगलिया स्टेशन | Prabhat Khabar Network

किशनगंज के गलगलिया रेलवे स्टेशन को D-Class से B-Class में बदलने की तैयारी शुरू। रेलवे ने 1.28 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया, जानें क्या होगा बदलाव।

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ठाकुरगंज/गलगलिया : बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे किशनगंज जिले के गलगलिया रेलवे स्टेशन की तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो गई है. सीमावर्ती क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण स्टेशन को डी-क्लास से बी-क्लास स्टेशन में परिवर्तित करने के लिए रेलवे ने 1 करोड़ 28 लाख 7 हजार रुपये से अधिक का टेंडर जारी किया है. रेलवे की इस पहल से गलगलिया स्टेशन के विकास को लेकर स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है.

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1.28 करोड़ रुपये का टेंडर, चार महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य

कटिहार रेल मंडल, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की ओर से जारी टेंडर की अनुमानित लागत 1 करोड़ 28 लाख 7 हजार रुपये है. कार्य को चार महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. टेंडर 21 अगस्त 2026 को जारी किया गया है, जबकि बोली जमा करने की अंतिम तिथि 17 सितंबर 2026 को दोपहर तीन बजे निर्धारित की गई है.

टेंडर के तहत 4,500 घन मीटर 50 एमएम मशीन-क्रश्ड पाकुड़ किस्म के बैलास्ट की आपूर्ति की जाएगी. इसके अलावा इतनी ही मात्रा में बैलास्ट को रेलवे ट्रैक पर फैलाने और निर्धारित प्रोफाइल तैयार करने का कार्य भी शामिल है.

सीमावर्ती क्षेत्र में बढ़ रहा स्टेशन का महत्व

अब तक छोटे दर्जे के स्टेशन के रूप में संचालित गलगलिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव सीमित रहा है. हालांकि इसकी भौगोलिक स्थिति और आसपास बढ़ रही औद्योगिक गतिविधियों ने स्टेशन के महत्व को बढ़ा दिया है.

नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमा के निकट स्थित होने के कारण गलगलिया यात्री परिवहन के साथ-साथ भविष्य में माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार से सीमावर्ती क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.

गुड्स सुविधा और यार्ड को लेकर भी रही है चर्चा

स्थानीय स्तर पर गलगलिया स्टेशन के विकास, गुड्स सुविधा और रेलवे यार्ड के विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि स्टेशन का दर्जा बढ़ने और रेलवे सुविधाओं का विस्तार होने से क्षेत्र के लोगों को यात्रा में सुविधा मिलेगी.

नेपाल सीमा से जुड़े व्यापार और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है. रेलवे के दस्तावेज में फिलहाल स्टेशन को डी-क्लास से बी-क्लास बनाने और बैलास्ट से जुड़े कार्यों का उल्लेख है.

पुराने सपनों को नए टेंडर से मिली उम्मीद

गलगलिया स्टेशन के विकास को लेकर पहले भी कई योजनाओं की चर्चा होती रही है. हालांकि वर्तमान टेंडर दस्तावेज में 1.28 करोड़ रुपये के बैलास्ट कार्य और स्टेशन के वर्गीकरण में बदलाव से संबंधित योजना ही स्पष्ट रूप से सामने आई है. गुड्स शेड या अन्य बड़े निर्माण कार्यों की पुष्टि इस टेंडर से नहीं होती है.

सीमावर्ती इलाके में स्थित गलगलिया स्टेशन के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. आने वाले समय में स्टेशन का दर्जा बढ़ने के साथ यहां यात्रियों की सुविधाओं और रेलवे गतिविधियों में भी विस्तार की उम्मीद की जा रही है.


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