खाद तो है पर बिना 'डिजिटल एंट्री' के नहीं मिलेगी! किशनगंज में FSAS App अनिवार्य, जानें क्यों परेशान हैं किसान

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सांकेतिक तस्वीर

किशनगंज जिले में खेतों में खाद की बढ़ती जरूरत के बीच उर्वरक बिक्री को डिजिटल सिस्टम से जोड़ दिया गया है। अब FSAS ऐप के माध्यम से ही खाद बेची जा सकेगी, जिससे किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

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ठाकुरगंज (किशनगंज). खेतों में खाद की जरूरत बढ़ने के बीच जिले में उर्वरक बिक्री की व्यवस्था को डिजिटल सिस्टम से जोड़ दिया गया है. जिला कृषि पदाधिकारी, किशनगंज की ओर से 21 अगस्त 2026 को जारी आदेश संख्या 2006 में सभी खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को FSAS App के माध्यम से ही उर्वरक की बिक्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

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अब बिना FSAS App नहीं बेच सकेंगे खाद

जिला कृषि पदाधिकारी के आदेश के अनुसार किसानों द्वारा उर्वरक की खरीद और प्राप्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित, किसान-केंद्रित और मांग आधारित बनाने के उद्देश्य से FSAS App विकसित किया गया है. जिले में इसे लागू करते हुए खुदरा विक्रेताओं के लिए ऐप के माध्यम से बिक्री अनिवार्य कर दी गई है. इसका मतलब है कि दुकान में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद निर्धारित डिजिटल प्रक्रिया पूरी किए बिना दुकानदार किसान को उर्वरक नहीं बेच सकेगा.

ग्रामीण किसानों के सामने डिजिटल चुनौती

ठाकुरगंज का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में छोटे एवं सीमांत किसान खेती पर निर्भर हैं. ऐसे में नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक सवाल भी उठ रहे हैं. जिन किसानों को स्मार्टफोन, इंटरनेट या ऑनलाइन प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं है, उनके लिए खाद खरीदना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है. किसानों के बीच यह सवाल भी है कि यदि दुकान पर खाद उपलब्ध हो, लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्या के कारण डिजिटल प्रक्रिया पूरी न हो पाए तो उन्हें उर्वरक कब और कैसे मिलेगा.

खेती के मौसम में तकनीकी परेशानी बन सकती है चुनौती

खेती के मौसम में खाद की जरूरत अक्सर तत्काल होती है. ऐसे में नेटवर्क की समस्या, ऐप में तकनीकी दिक्कत या डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी का अभाव किसानों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. यदि प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण किसान को दुकान से वापस लौटना पड़ा तो इसका सीधा असर कृषि कार्य पर पड़ने की आशंका है.

दुकानदारों पर भी सख्ती

आदेश में खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि FSAS App के बिना उर्वरक की बिक्री करने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी. संबंधित विक्रेता की उर्वरक अनुज्ञप्ति को निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है. आदेश की प्रतिलिपि थोक उर्वरक विक्रेताओं, कृषि समन्वयकों, प्रखंड कृषि पदाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है. सभी को नई व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित कराने और उल्लंघन की स्थिति में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

पारदर्शिता बढ़ाना है विभाग का उद्देश्य

विभाग का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरक की बिक्री और किसानों तक उसकी पहुंच को अधिक पारदर्शी एवं मांग आधारित बनाना है. वैशाली और शेखपुरा में FSAS के प्रयोग के बाद किशनगंज समेत अन्य जिलों में भी इसे लागू किया गया है. अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐप की कार्यप्रणाली समझने तथा आवश्यक प्रशिक्षण लेने का निर्देश भी दिया गया है.

अब किसानों के लिए होगी व्यवस्था की असली परीक्षा

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब देखना होगा कि FSAS App किसानों तक खाद की उपलब्धता को कितना आसान बनाता है. खासकर उन किसानों के लिए विभाग को ऐसी वैकल्पिक सहायता व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, जिन्हें डिजिटल प्रक्रिया का पर्याप्त ज्ञान या सुविधा उपलब्ध नहीं है. तकनीक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना उद्देश्य है, लेकिन किसानों की तत्काल जरूरत और ग्रामीण क्षेत्रों की डिजिटल पहुंच को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को सहज बनाना भी उतना ही जरूरी होगा.


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