खगड़िया: परबत्ता में गंगा के जलस्तर में 9 सेमी की गिरावट के बावजूद मुश्किलें बरकरार, खेतों में जमा बाढ़ का पानी

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बाढ़ के पानी से घिरे घर

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ का असर जारी है. निचले इलाकों और खेतों में पानी जमा होने से आवागमन ठप है और हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे भीषण चारा संकट खड़ा हो गया है. पशुपालक मवेशियों के साथ तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं.

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खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड क्षेत्र में गंगा नदी के जलस्तर में पिछले 24 घंटों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित दियारा और निचले इलाकों में ग्रामीणों की दुश्वारियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. प्रखंड की भरसो पंचायत के सलारपुर और सौढ़ दक्षिणी पंचायत के विकास नगर तेमथा करारी (शर्मा टोला) सहित कई गांवों के निचले हिस्सों और खेतों में अब भी बाढ़ का पानी जमा है. राहत की बात यह है कि रिहायशी घरों के भीतर पानी नहीं घुसा है, लेकिन रास्तों पर भारी जलजमाव के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है. दियारा क्षेत्र में हजारों एकड़ फसल डूबने के कारण भीषण चारा संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते पशुपालक अपने मवेशियों के साथ गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर शरण लेने को मजबूर हैं.

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जलजमाव से आवागमन ठप, कई परिवार घरों में कैद

जलस्तर में आंशिक गिरावट के बाद भी जमीनी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं:

  • प्रभावित इलाके: भरसो पंचायत का सलारपुर गांव और सौढ़ दक्षिणी पंचायत का विकास नगर तेमथा करारी स्थित शर्मा टोला जलजमाव की चपेट में हैं.
  • आवाजाही पर असर: संपर्क पथों पर पानी भरे होने के कारण कई परिवार अपने घरों तक सीमित होकर रह गए हैं.
  • प्रशासनिक नावों का संचालन: प्रभावित आबादी को मुख्य मार्ग तक सुरक्षित लाने-ले जाने के लिए अंचल प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों पर छोटी नावों का परिचालन कराया जा रहा है.

फसलें बर्बाद, चारे की किल्लत; तटबंध बना पशुपालकों का सहारा

गंगा में आई बाढ़ के कारण प्रखंड का विशाल दियारा इलाका जलमग्न हो चुका है:

  • फसल क्षति व महंगाई: खेतों में बाढ़ का पानी लंबे समय से जमा रहने के कारण किसानों की हजारों एकड़ खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं.
  • आसमान छूते हरे चारे के दाम: चारे के खेत डूब जाने से इलाके में हरे चारे की भारी किल्लत हो गई है और इसके दाम कई गुना बढ़ गए हैं. बाजार में सूखा चारा भी मुश्किल से मिल रहा है.
  • गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर शरण: चारे और सुरक्षित स्थान के अभाव में दर्जनों पशुपालक अपने मवेशियों के साथ गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर खुले आसमान के नीचे डेरा जमाए हुए हैं और वहीं से पशुओं के दाना-पानी का प्रबंध कर रहे हैं.
बाढ़ के पानी से घिरे घर, जीएन बांध पर पशुपालक | Prabhat Khabar Network
जीएन बांध पर पशुपालक | Prabhat Khabar Network

12 घंटे में 9 सेमी घटा जलस्तर, HFL से 1.45 मीटर नीचे गंगा

प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बाढ़ बुलेटिन के अनुसार:

  • वर्तमान जलस्तर: 30 अगस्त की शाम जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 12 घंटे में गंगा के जलस्तर में 9 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई.
  • आंकड़े: परबत्ता में गंगा का जलस्तर 34.89 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि यहां उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 36.34 मीटर है. वर्तमान में नदी खतरे के उच्चतम बिंदु (HFL) से करीब 1.45 मीटर नीचे बह रही है.

'संध्या चौपाल' के जरिए आपदा मित्र कर रहे जागरूक

अंचल प्रशासन स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखे हुए है:

  • जागरूकता अभियान: प्रभावित गांवों में 'आपदा मित्रों' की मदद से नियमित रूप से संध्या चौपाल का आयोजन किया जा रहा है.
  • सुरक्षा उपाय: चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों को बाढ़ जनित जल बीमारियों, गहरे पानी में न जाने और सरकारी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रियाओं के प्रति सतर्क किया जा रहा है.
  • सतर्कता: अंचलाधिकारी के अनुसार, प्रशासनिक टीमें फील्ड में तैनात हैं और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त राहत व बचाव सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.


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