बारसोई में वैदिक विधि से स्थापित हुईं भगवान गणेश की प्रतिमाएं: मां क्लब से स्टेशन रोड तक सजे पंडाल, देखें पूजा का पूरा कार्यक्रम
बारसोई बाजार श्री विष्णु के समीप बने आकर्षक पूजा पंडाल | Prabhat Khabar Network
बारसोई नगर और ग्रामीण अंचल भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रंग में रंग गया है. वैदिक विधि-विधान से स्थापित गणेश प्रतिमाएं और जगमगाते पूजा पंडाल भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं. यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन गया है.
प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता एवं मंगलकारी भगवान श्री गणेश के पावन जन्मोत्सव के साथ ही कटिहार जिले का बारसोई नगर व ग्रामीण अंचल पूरी तरह भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर हो गया है. सोमवार से वैदिक विधि-विधान और अनुष्ठान के साथ नगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर भगवान गजानन की नयनाभिराम प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिससे समूचा परिवेश आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा है.
नगर पंचायत से लेकर प्रखंड के दूर-दराज इलाकों तक श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. रंग-बिरंगी थीम आधारित सजावट और आधुनिक डिजिटल विद्युत रोशनी से जगमगाते पूजा पंडाल श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं.
बारसोई के इन प्रमुख स्थलों पर सजे भव्य पूजा पंडाल
बारसोई में गणेशोत्सव को लेकर कई प्रमुख सामाजिक और युवा कमेटियों ने आकर्षक पंडालों का निर्माण किया है:
- मां क्लब (दुर्गा स्थान): बारसोई बाजार के दुर्गा स्थान स्थित मां क्लब द्वारा भव्य पंडाल और प्रतिमा स्थापित की गई है, जहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जुट रही है.
- श्री विष्णु मंदिर परिसर के समीप: अति प्राचीन विष्णु मंदिर के पास कलात्मक विद्युत साज-सज्जा के साथ भव्य पंडाल बनाया गया है.
- रास चौक दुर्गा मंदिर परिसर: रास चौक पर स्थापित गणेश प्रतिमा के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग रही हैं.
- स्टेशन पानी टंकी रोड: बारसोई रेलवे स्टेशन के समीप पानी टंकी परिसर में युवाओं की टोली ने विशेष पंडाल तैयार कर पूजा-अर्चना का शुभारंभ किया है.
हर मांगलिक कार्य से पहले क्यों होती है गणेश वंदना?
सनातन धर्म परंपरा में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य का विशिष्ट स्थान प्राप्त है:
- निर्विघ्न कार्य सिद्धि: पौराणिक मान्यता के अनुसार किसी भी नए अनुष्ठान, व्यापार या मांगलिक कार्य का आरंभ गणेश वंदना से करने पर मार्ग की समस्त बाधाएं (विघ्न) स्वतः समाप्त हो जाती हैं.
- बुद्धि और विवेक के अधिष्ठाता: भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समृद्धि के देवता हैं.
- पारंपरिक नैवेद्य: पंडालों और घरों में श्रद्धालु भगवान को दूर्वा (दूब), लाल पुष्प, मोदक और बेसन के लड्डू अर्पित कर परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और दीर्घायु की प्रार्थना कर रहे हैं.
धार्मिक आस्था के संग सामाजिक समरसता की मिसाल
बारसोई में आयोजित हो रहा गणेशोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का सशक्त केंद्र बन गया है:
- सभी वर्गों की सहभागिता: पंडालों की व्यवस्था से लेकर प्रसाद वितरण तक में स्थानीय व्यापारी, युवा और बुजुर्ग कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए हैं.
- पारिवारिक उत्साह: शाम की महाआरती के समय महिलाओं और बच्चों का विशेष उत्साह देखते ही बनता है. 'गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया' के गगनभेदी जयघोष से पूरा बारसोई भक्ति रस में गोते लगा रहा है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए