खतरे के निशान से 53 सेमी ऊपर बह रही गंगा! नेपाल की तबाही के बाद बरारी के 14 पंचायतों में बाढ़ का खौफ, डूबीं सड़कें
फोटो- नीचले इलाके में प्रवेश किया बाढ़ का पानी | Prabhat Khabar Network
कटिहार के बरारी प्रखंड में गंगा, कोसी और बरंडी नदियों के जलस्तर में भारी वृद्धि देखी जा रही है. गंगा खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है. कई गांवों की सड़कें डूबने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
कटिहार, बरारी. प्रखंड क्षेत्र में गंगा, कोसी और बरंडी नदियों के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है. कई गांवों की सड़कें डूब जाने से आवागमन प्रभावित हो गया है, जबकि कुछ गांवों का संपर्क भी बाढ़ के पानी के कारण टूटने लगा है. नेपाल में बाढ़ से मची तबाही की खबरों के बीच सीमावर्ती इलाकों में भी लोगों के बीच भय का माहौल है. ग्रामीण अभी से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में जुट गए हैं.
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गंगा उफान पर, बरंडी भी चढ़ाई पर
गंगा के साथ कोसी और बरंडी नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है. गंगा एवं बरंडी नदी के किनारे बसे करीब 14 पंचायतों के दर्जनों गांवों और कस्बाई इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है. भवानीपुर, कुंडी, आदिवासी टोला, कुंडाराही, उचला हरिजन टोला, गुरुमेला, हरीशपुर, देबराधार और डुब्बा टोला सहित कई गांवों की सड़कें पानी में डूब गई हैं.
सड़कें डूबीं, गांवों का आवागमन प्रभावित
सड़कों पर बाढ़ का पानी जमा होने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है. बाढ़ से घिरे गांवों में लोगों को स्वास्थ्य सेवा, प्रसव, जरूरी सामान और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
ऊंचे स्थान की तलाश में जुटे ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग संभावित खतरे को देखते हुए अभी से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश करने लगे हैं. नेपाल में हुई भीषण बाढ़ की जानकारी के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है. लोगों को आशंका है कि नदियों में जलप्रवाह बढ़ने पर निचले इलाकों में पानी का फैलाव और अधिक हो सकता है.
गंगा खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल काढ़ागोला के सहायक अभियंता विजय कुमार ने बताया कि गंगा नदी खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. हालांकि कोसी नदी फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
ग्रामीणों ने नाव परिचालन की मांग की
ग्रामीणों ने बताया कि कई जगह सड़कें डूब जाने के कारण पैदल और वाहनों से आवागमन मुश्किल हो गया है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए नाव का परिचालन जरूरी हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि खासकर गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और जरूरी सामान की आवाजाही के लिए नाव की व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए.
जलस्तर बढ़ा तो बढ़ सकती है परेशानी
ग्रामीणों की नजर अब नदियों के जलस्तर पर टिकी है. यदि गंगा, बरंडी और कोसी के जलस्तर में और वृद्धि होती है तो निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है. प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है, जबकि ग्रामीण सुरक्षित स्थान और आवागमन के वैकल्पिक साधनों को लेकर तैयारी में जुटे हैं.
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