अमदाबाद: गंगा में 9 और महानंदा में 8 सेमी का उछाल, दर्जन भर नए गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, एक ही छत के नीचे इंसान और मवेशी
मचान पर इंसान व जानवर एक साथ
कटिहार के अमदाबाद में गंगा और महानंदा नदियों के उफान ने जलप्रलय मचा दिया है. करीब एक दर्जन नए गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से हालात बेकाबू हो गए हैं. लोग जान बचाने के लिए सड़क किनारे मचान बनाकर रहने को मजबूर हैं, जहां भोजन, पानी और स्वच्छता का गंभीर संकट है.
कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में गंगा और महानंदा दोनों नदियों के उफान ने जलप्रलय जैसी स्थिति पैदा कर दी है. पिछले 12 घंटे के भीतर गंगा के जलस्तर में 9 सेंटीमीटर और महानंदा के जलस्तर में 8 सेंटीमीटर की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है. जलस्तर में लगातार हो रहे इस इजाफे से प्रखंड के निचले इलाकों के बाद अब करीब एक दर्जन नए गांवों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है. बाढ़ की विभीषिका के बीच ऊपर से हो रही बारिश ने विस्थापित परिवारों की मुश्किलें चौगुनी कर दी हैं. शुद्ध पेयजल, भोजन, शौचालय और पशु चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. जलेबी टोला सहित कई तटीय बस्तियों में हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि लोग जान बचाने के लिए सड़क किनारे अस्थायी मचान बनाकर अपने मासूम बच्चों और मवेशियों के साथ एक ही तिरपाल के नीचे रातें काटने को विवश हैं.
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15 दिनों से जारी तबाही, रोजी-रोटी का साधन भी ठप
अमदाबाद के तटवर्ती गांवों में बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है:
- जलेबी टोला में भीषण संकट: गांव के अधिकांश लोग दैनिक मजदूरी और मछली पकड़कर परिवार का पेट पालते हैं. बाढ़ का फैलाव बढ़ने और तेज धारा के चलते मछली मारना असंभव हो गया है और इलाके में मजदूरी के सारे काम ठप हैं, जिससे परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है.
- एक ही मचान पर परिवार और जानवर: अशोक सिंह, सिंहासन सिंह, श्रीकांत सिंह, महेश सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि घरों और आंगनों में 3 से 4 फीट पानी भर जाने के कारण वे मुख्य सड़क के किनारे बांस का मचान बनाकर शरण लिए हुए हैं. मचान पर ही खाना बन रहा है और उसी के नीचे मवेशियों को बांधा गया है.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और मौजूदा स्थिति का विवरण
| प्रमुख बिंदु (Key Points) | वर्तमान स्थिति एवं प्रभाव (Current Status & Impact) |
| जलस्तर में बढ़ोतरी (12 घंटे) | गंगा: +9 सेमी | महानंदा: +8 सेमी |
| पहले से प्रभावित गांव | मेघु टोला, जलेबी टोला, चौका चामा, बालमुकुंद टोला, राम अवतार कॉलोनी, नारायणपुर, लक्खी टोला, रामचंद टोला, भवानीपुर खट्टी (रायचंद, नीताई, विनोद टोला) |
| वर्तमान विस्तार | लगभग 12 नए ग्रामीण टोलों में बाढ़ के पानी का नया प्रवेश |
| शरण स्थल | सड़क किनारे बनाए गए अस्थायी मचान व तटबंध |
| बुनियादी संकट | शुद्ध पेयजल की कमी, शौचालय का अभाव, बच्चों में संक्रामक बीमारियां |
| पशुपालकों की स्थिति | चारागाह डूबे, नावों पर पशुओं को लादकर ऊंचे ठिकानों की तलाश |
प्रशासनिक मदद न मिलने से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
15 दिन बीत जाने के बावजूद पीड़ितों तक बुनियादी राहत न पहुंचने से लोगों में भारी रोष है:
- पॉलीथिन और राशन की दरकार: ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी घुसे दो हफ्ते से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने अब तक उनकी कोई सुध नहीं ली है. न तो सिर छिपाने के लिए प्लास्टिक शीट (पॉलीथिन) बांटी गई है और न ही सूखा राशन पैकेट वितरित किए गए हैं.
- बीमारियों का खतरा: दूषित पानी के बीच रहने और रूखा-सूखा खाने से छोटे बच्चे और बुजुर्ग डायरिया व बुखार जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.
- शीघ्र राहत शिविर की मांग: पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत नावों का परिचालन कराने, सूखा राशन किट, शुद्ध पेयजल के टैंकर, मोबाइल शौचालय, मवेशियों के लिए सूखा चारा और स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने की पुरजोर गुहार लगाई है.
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