यहां और बढ़ जाता है दर्द समस्या. सदर अस्पताल में मरीजों को नहीं िमल रही सुविधाएं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कटिहार : सदर अस्पताल में कुव्यवस्था का आलम बरकरार है. मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रहा है. इसके कारण गरीब तबके के मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है. गौरतलब हो कि सदर अस्पताल में अधिकांश मरीज गरीब तबके के ही पहुंचते हैं. जिनके पास इलाज कराने के पैसे नहीं होते हैं. जबकि […]
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कटिहार : सदर अस्पताल में कुव्यवस्था का आलम बरकरार है. मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रहा है. इसके कारण गरीब तबके के मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है. गौरतलब हो कि सदर अस्पताल में अधिकांश मरीज गरीब तबके के ही पहुंचते हैं. जिनके पास इलाज कराने के पैसे नहीं होते हैं. जबकि अमीर तबके के लोग निजी क्लिनिक में इलाज करा लेते हैं.
यही नहीं मरीजों के बेड का चादर हर दिन बदलने का नियम लेकिन तीन-चार दिन बाद भी चादर को चेंज नहीं किया जाता है. ऐसे में मरीजों को गंदगी के बीच रहने को विवश होना पड़ रहा है. मरीजों को अधिकांश दवा बाहर से खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है. अस्पताल से दवा नहीं मिलने के कारण गरीब मरीज ठीक ढंग से इलाज कराने से वंचित हो रहे हैं. कभी शव का पोस्टमार्टम तीन दिनों तक नहीं होता है तो कभी प्रसव वार्ड से बच्चा चोरी हो जाता है तो कभी ओपीडी में डॉक्टर ही नहीं रहते हैं. इन सुर्खियों में रहने के बाद भी अस्पताल प्रबंधक व अस्पताल प्रशासन द्वारा इन समस्याओं का कोई हल नहीं निकाला जाता है. यही नहीं सुबह आठ से 12 बजे तक चलने वाले ओपीडी से भी चिकित्सक लगातार गायब रहते हैं जिसके कारण कई बार मरीज को वापस लौटना पड़ता है.
सदर अस्पताल बना कमाई का अड्डा
अस्पताल में इन दिनों दलालों का जमावड़ा है. यह दलाल पर प्रसव वार्ड में आये मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में ले जाते हैं ताकि उन्हें इनके बदले अच्छी कमीशन मिल सके. इन चीजों को रोकने के लिए सरकार द्वारा हर क्षेत्र में आशा का बहाली की गयी है. इससे किसी मरीज को किसी प्रकार की परेशानी अस्पताल में ना हो. लेकिन इन दिनों आशा ही सबसे बड़ी दलाल है.अस्पताल में आशा द्वारा किसी मरीज को लाया जाता है तो सारा जवाबदेही आशा की होती है. इसी बात का फायदा आशा उठाती है. अस्पताल में प्रसूता मरीजों को निशुल्क दवाई मिलती है. लेकिन आशा व प्रसव वार्ड के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह दवाई बाहर से मंगायी जाती है. जिससे आशा व प्रसव वार्ड के कर्मचारियों को इनका कमीशन मिलता. हद तो तब हो जाती है. जब आशा व प्रसव वार्ड के कर्मचारियों की मिलीभगत से इन मरीजों को नर्सिंग होम भेज दिया जाता है. अगर किसी मरीज को नर्सिंग होम किसी आशा द्वारा ली ले जाया जाता है तो नर्सिंग होम द्वारा हर एक मरीज पर 1000 रुपए आशा को कमीशन के रूप में मिलता है और यह पैसे आशा व प्रसव वार्ड के कर्मचारियों द्वारा बांट लिया जाता है. इस बाबत सीएस डॉ श्याम चंद्र झा ने कहा कि सदर अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए डीएस को निर्देश दिया गया है. मरीजों को हर सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयास जारी है.
अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधा नदारद : अस्पताल के वार्ड में भरती मरीजों को मिलने वाली सुविधा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है. सुविधाओं की बात करें तो बाद में भरती मरीजों को सातों दिन साफ सुथरी चादर देना है. जब चादर पूरी तरह गंदी हो जाती है तब जाकर उसे बदला जाता है. शाम होते ही अस्पताल में मच्छरों का आतंक फैल जाता है. लेकिन अस्पताल प्रबंधक द्वारा भरती मरीजों को मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी नहीं दी जाती है.
सदर अस्पताल के परिसर में अस्पताल प्रबंधक द्वारा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कहीं नहीं की गयी है. अस्पताल में भरती हुए मरीज पीने योग पानी लाने के लिए बाहर जाते हैं और बाहर से पानी भर कर लाते हैं. अस्पताल परिसर में चार नलकूप एक चापाकल लगाये गये हैं, लेकिन तीन में से दो नलकूप खराब पड़े हुए हैं. सफाई की बात करें तो सिर्फ झाड़ू मार कर पानी का पोंछा लगा कर यहां पर सफाई होती है. प्रसव वार्ड का हाल काफी दयनीय है. रोजाना दो से चार प्रसूता डिलिवरी कराने यहां आते हैं. लेकिन उन्हें अस्पताल द्वारा बेडशिट के अलावा कुछ भी नहीं मिलता है.
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