उपेक्षा. दो दशक से रेल के िवकास में पीछे रहा है कटिहार

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कटिहार जंकशन देश के कुछ चुनिंदा रेलवे स्टेशनों में शुमार रहा है. लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की वजह से पिछले दो दशक से कटिहार रेलवे विकास के मामले में पिछड़ती रही है.कटिहार से लंबी दूरी की जो ट्रेनें थी, उसका भी विस्तार कर दूसरे क्षेत्र में कर दिया गया. कटिहार : पूर्वोत्तर भारत का मुख्य द्वार […]

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कटिहार जंकशन देश के कुछ चुनिंदा रेलवे स्टेशनों में शुमार रहा है. लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की वजह से पिछले दो दशक से कटिहार रेलवे विकास के मामले में पिछड़ती रही है.कटिहार से लंबी दूरी की जो ट्रेनें थी, उसका भी विस्तार कर दूसरे क्षेत्र में कर दिया गया.

कटिहार : पूर्वोत्तर भारत का मुख्य द्वार कहे जाने वाला कटिहार रेलवे जंकशन पिछले दो दशक से उपेक्षा का शिकार है. गुरुवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा संसद में रेल बजट प्रस्तुत की जानी है. ऐसे में कटिहार वासियों सहित सीमांचल के लोगों को उम्मीद है कि कटिहार सहित कोसी-पूर्णिया के क्षेत्र के लिए कुछ विशेष मिलेगा. हालांकि लोगों ने इस तरह की उम्मीदें रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पिछले रेल बजट से भी थी.
लेकिन लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. आशावादी लोग एक बार फिर रेलवे बजट से उम्मीद पाले हुए हैं. यह सर्वविदित है कि कटिहार जंकशन देश के कुछ चुनिंदा रेलवे स्टेशनों में शुमार रहा है. लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की वजह से पिछले दो दशक से कटिहार रेलवे विकास के मामले में पिछड़ता रहा है. खासकर यात्री सुविधाओं के मामले में रेलवे से कुछ नहीं मिला. यहां तक कि कटिहार से लंबी दूरी की जो ट्रेनें थीं, उसका भी विस्तार कर दूसरे क्षेत्र लेकर चला गया.
कटिहार से कई बड़े शहरों के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. मसलन, दक्षिण भारत, रांची सहित देश के बड़े शहरों में जाने के लिए कटिहार से कोई सीधी ट्रेन नहीं है. पिछले दो दशक के दौरान जब भी इस क्षेत्र में रेल मंत्री व रेलवे के आलाधिकारी आते रहे हैं, तब यहां के जनप्रतिनिधि व यात्री संघ, व्यावसायिक संघ आदि के द्वारा बड़े शहरों तक जाने के लिए नई ट्रेनों की मांग की जाती रही है.
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