होर्डिंग्स में सिमट कर रह गयी साफ-सपाई

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अव्यवस्था. अस्पताल का शौचालय बदहाल सदर अस्पताल व नप सहित सरकारी महकमों में नहीं दिया जाता है स्वच्छता पर ध्यान भभुआ सदर : गांव कस्बों से लेकर शहर मुख्यालय तक स्वच्छता की बातें हो रही हैं. लाखों रुपये इस अभियान के पीछे खर्च भी किये जा रहे हैं. शहर का शायद ही ऐसा कोई चौक-चौराहा […]

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अव्यवस्था. अस्पताल का शौचालय बदहाल

सदर अस्पताल व नप सहित सरकारी महकमों में नहीं दिया जाता है स्वच्छता पर ध्यान
भभुआ सदर : गांव कस्बों से लेकर शहर मुख्यालय तक स्वच्छता की बातें हो रही हैं. लाखों रुपये इस अभियान के पीछे खर्च भी किये जा रहे हैं. शहर का शायद ही ऐसा कोई चौक-चौराहा हो, जहां पर स्वच्छता के प्रति जागरूक करनेवाले होर्डिंग व बैनर नहीं लगे हों, लेकिन बुनियादी तौर पर स्वच्छता को लेकर सरकारी महकमा खुद जागरूक नहीं है. सदर अस्पताल, नगर पर्षद सहित अन्य अधिकांश सरकारी कार्यालयों में शौचालयों की स्थिति बदतर है. मंगलवार को सदर अस्पताल सहित नगर पर्षद में स्थित शौचालयों का जायजा लिया गया, तो पता चला कि होर्डिंग्स व बैनरों तक ही स्वच्छता अभियान सिमटा हुआ है.
कर्मचारी नियुक्त, पर नहीं हो रही सफाई : सदर अस्पताल में मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने आते हैं, लेकिन वे अस्पताल के शौचालय का उपयोग कर लें, तो बहुत संभव है कि वे और बीमार पड़ जायेंगे. सदर अस्पताल के हर वार्ड में शौचालय की व्यवस्था है. इन विभागों मेें कर्मचारी भी हैं लेकिन शौचालयों की सफाई नहीं होती है. सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में निचले फ्लोर पर पांच शौचालय हैं. पड़ताल के दौरान सभी शौचालयों की हालत बदतर दिखी. शौचालय को लगभग कूड़ेदान बना दिया गया था व उसकी हालत देख कर लग रहा था कि कई महीनों से इनकी सफाई नहीं हुई है.
अस्पताल के कैदी वार्ड व ओपीडी की ओर स्थित शौचालय की भी हालत खराब दिखी. शौचालय का हौज टूट गया है. बाहर व भीतर गंदगी का अंबार है. ऐसा लगता है कि लोग बाहर ही शौचालय करते हैं.
नप में महिला व पुरुष के लिए एक ही शौचालय
नप विभाग के शौचालय की भी हालत खराब है. नप कार्यालय में तीन शौचालय हैं. इसमें एक मुख्य पार्षद के चैंबर में, एक कार्यपालक पदाधिकारी के चैंबर व एक कर्मचारियों के कार्यालय से जुड़ा है. कर्मचारियों के लिए बने शौचालय में भी गंदगी का अंबार है. जानकारी के अनुसार इसी एक शौचालय में महिला-पुरुष दोनों जाते हैं. नप कार्यालय के मुख्य द्वार से लेकर परिसर तक के कोने गुटखा के पिक से लाल हो चुके हैं.
हर माह सफाई के नाम पर खर्च होते हैं लाखों रुपये
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में साफ-सफाई का काम एनजीओ के जिम्मे है. हर माह साफ-सफाई के लिए एक लाख से अधिक रुपये का भुगतान किया जाता है. वहीं, नप में 73 सफाई कर्मचारी काम करते हैं, जिनकी तनख्वाह पर हर महीने 10 से 15 लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन शौचालय की सूरत नहीं बदल रही है.
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