मनरेगा मजदूरों के 78 लाख रुपये बकाया
भभुआ नगर : ग्रामीण विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है. पंचायत स्तर पर न तो मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है और न ही सरकार के ग्रामीण विकास का सपना ही साकार होता दिख रहा […]
भभुआ नगर : ग्रामीण विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है. पंचायत स्तर पर न तो मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है और न ही सरकार के ग्रामीण विकास का सपना ही साकार होता दिख रहा है. मनरेगा से जुड़ी योजनाएं भी काफी सुस्त रफ्तार से चल रही हैं.
जिले में निबंधित जॉब कार्डधारी मजदूरों की संख्या लगभग दो लाख है. मगर, मजदूरों को जिस हिसाब से काम मिलना चाहिए, वो मिल नहीं रहा. ऐसे में मजदूर काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं. दर्जनों मजदूरों का कहना है कि पंचायत जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों के यहां रोजगार मुहैया कराने के लिए गुहार लगाने के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. वित्तीय वर्ष 2015-16 में ही मनरेगा के तहत काम हो जाने के बावजूद मजदूरों के 78 लाख 63 हजार 476 रुपये सरकार पर अब भी बकाया है जिसके भुगतान की प्रक्रिया काफी सुस्त है.
विश्वासी लोगों को ही मिलता है काम : योजना के अंतर्गत काम उन्हीं मजदूरों को दिया जाता है जो प्रतिनिधियों व पंचायत रोजगार सेवकों के अति विश्वास पात्र होते हैं. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आजकल तो इस योजना में जेसीबी व ट्रैक्टर का प्रयोग आम बात है और मजदूरों का काम सिर्फ बैंक से पैसा निकासी कर प्रतिनिधियों के पास पहुंचाने तक सिमट कर रह गया है, हालांकि इसके लिए उन्हें उचित पारिश्रमिक मिल जाता है.
समय से नहीं हो रहा भुगतान
15 दिनों के अंदर ही मनरेगा में मजदूरी भुगतान का प्रावधान है, लेकिन यहां मजदूरों की मजदूरी के भुगतान की प्रक्रिया भी काफी सुस्त है. मिली जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 में ही जिले के मनरेगा मजदूरों का 78 लाख 63 हजार 724 रुपया सरकार पर बकाया है. मनरेगा के तहत जिले में संचालित योजनाओं की बात करें तो वित्त वर्ष 2013-14 से अब तक 15,959 योजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनमें 9519 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि 6440 योजनाएं अब भी लंबित हैं.
योजनाओं में हो रही मानकों की अनदेखी
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत हुए और हो चुके कार्यों में मानकों की घोर अनदेखी हुई है जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके बाद भी वरीय अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है.
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