निगरानी को नहीं मिले जिले के 467 शिक्षकों के फोल्डर

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मेधासूची से 200 शिक्षकों के नाम गायब, पर सभी कर रहे ड्यूटी कोर्ट के आदेश पर फोल्डर देने के लिए तीन हफ्ते का मिला था समय भभुआ (नगर) : ली सार्टिफिकेट पर बहाल शिक्षकों की बेचैनी एक बार फिर से बढ़ सकती है. निगरानी विभाग अब जिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर ड‍्यूटी कर […]

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मेधासूची से 200 शिक्षकों के नाम गायब, पर सभी कर रहे ड्यूटी

कोर्ट के आदेश पर फोल्डर देने के लिए तीन हफ्ते का मिला था समय
भभुआ (नगर) : ली सार्टिफिकेट पर बहाल शिक्षकों की बेचैनी एक बार फिर से बढ़ सकती है. निगरानी विभाग अब जिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर ड‍्यूटी कर रहे शिक्षक व शिक्षिकाओं पर शिकंजा कसेगा. वर्ष 2002 से 2012 तक नियोजित शिक्षकों से संबंधित दस्तावेज की जांच के लिए निगरानी को उपलब्ध कराने का विभागीय फरमान भी धरा का धरा रह गया.
जानकारी के अनुसार अब भी जिले के विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत कुल 467 शिक्षकों के फोल्डर निगरानी को प्राप्त नहीं हुए हैं. इतना हीं नहीं निगरानी द्वारा शिक्षकों के फोल्डर के साथ मेधासूची की भी जांच की जा रही है. इसमें 200 शिक्षकों के नाम मेधासूची से गायब हैं. लेकिन, जिन शिक्षकों के फोल्डर व मेधा सूची में नाम दर्ज नहीं है, वह मजे से अपनी ड‍्यूटी कर रहे हैं. ऐसे शिक्षकों के प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज की जांच निगरानी द्वारा करायी जा रही है.
इस संबंध में जानकारी देते हुए निगरानी विभाग के इंस्पेक्टर द्विवेदी फणीभूषण ने बताया कि नियोजित शिक्षकों से जुड़े कुल 467 फोल्डर अब तक निगरानी को प्राप्त नहीं हुए हैं. वहीं 200 शिक्षकों का मेधासूची में नाम ही दर्ज नहीं है.
उन्होंने आगे बताया कि 19 जुलाई को हाइकोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई भी हुई. हाईकोर्ट के निर्देश पर निगरानी ने सभी नियोजन इकाइयों व डीपीओ को फोल्डरों को जमा कराने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है. निर्धारित समय तक फोल्डर जमा नहीं करने पर इन सभी के उपर कार्रवाई निश्चित है.
अनुभव प्रमाणपत्रों की भी हो रही जांच : शिक्षक नियोजन के दौरान अनुभव प्रमाणपत्र के द्वारा 20 नंबर का वेटेज लेनेवाले अभ्यर्थियों की भी गहनता से जांच की जा रही. द्विवेदी फणीभूषण ने बताया कि ऐसी सूचना प्राप्त हुई है कि जाली अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर कई अभ्यर्थियों ने 20 नंबर का वेटेज लिया है. इसकी जांच चल रही है. विभिन्न स्रोतों स मिल रही जानकारी के अनुसार, जिले मे अब भी कई शिक्षक जाली प्रमाणपत्रों के आधार पर अपनी सेवा दे रहे हैं. उनके विरुद्ध भी जांच की प्रक्रिया जल्द शुरू की जायेगी. ऐसे मामलों में दोषी शिक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जायेगी.
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