वचन देने में क्या लगता है...
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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पंचायत चुनाव. न जाने जीतने के बाद कौन प्रत्याशी काम आ जाये वोट के जुगाड़ में दिन-रात एक कर रहे प्रत्याशियों को सगे-संबंधियों की खूब फिक्र है. चुनावी गणित में एक-एक वोट के महत्व को देखते हुए प्रत्याशी रिश्तेदार ढूंढ रहे हैं. प्रत्याशी अपने व कथित रिश्तेदार के यहां लाव-लश्कर लेकर पहुंच जा रहे हैं, […]
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पंचायत चुनाव. न जाने जीतने के बाद कौन प्रत्याशी काम आ जाये
वोट के जुगाड़ में दिन-रात एक कर रहे प्रत्याशियों को सगे-संबंधियों की खूब फिक्र है. चुनावी गणित में एक-एक वोट के महत्व को देखते हुए प्रत्याशी रिश्तेदार ढूंढ रहे हैं. प्रत्याशी अपने व कथित रिश्तेदार के यहां लाव-लश्कर लेकर पहुंच जा रहे हैं, जहां नैतिकता के नाते चाय-पानी के लिए पूछना ही पड़ रहा है. हालांकि, वे मन ही मन सोच रहे हैं कि वचन देने में क्या लगता है, जो आये सबको मदद का भरोसा दो. न जाने जीतने के बाद कौन प्रत्याशी कुछ काम आ जाये.
भभुआ (नगर) : पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा तकनीकी और पहुंच का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है. वोट के जुगाड़ में दिन रात एक कर रहे प्रत्याशियों को सगे-संबंधियों की खूब फिक्र है. चुनावी गणित में एक-एक वोट के महत्व को देखते हुए प्रत्याशी रिश्तेदार ढूंढ रहे हैं. कल तक उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनके चुनाव क्षेत्र में पड़नेवाले गांव में उनके रिश्तेदार भी हैं.
यदि नजदीकी रिश्ता नहीं बन पाया तो दूर का रिश्ता भी जोड़ रहे हैं और यहां भी जुगाड़ फिर नहीं हुआ तो गांव के रिश्तेदार को भी अपना लेने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं. चुनावी माहौल में एक बारगी रिश्ते की दुहाई मतदाता भी बखूबी भाप रहे हैं. अचानक रिश्तेदारों के भंवर जाल में मतदाताओं को कीमत चुकानी पड़ रही है. प्रत्याशी अपने व कथित रिश्तेदार के यहां लाव लश्कर लेकर विराजमान हो जाते हैं तो नैतिकता के नाते चाय-पानी के लिए पूछना ही पड़ रहा है. भीषण गरमी में प्रत्याशी अपने रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं.
तीखे तापमान के कारण उनके रिश्तेदारों को चाय की जगह शरबत का इंतजाम भी करना पड़ रहा है, नहीं तो ठंडे पेय पदार्थ की डिमांड जोरों पर है. प्रत्याशियों के चक्कर में मतदाताओं को अपनी जेब ढ़ीली करनी पड़ रही है. रिश्तेदार प्रत्याशी इतने से संतुष्ट नहीं होते. पूरे परिवार का वोट अधिकार पूर्वक मांग रहे हैं और पूरे टोले की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर सौंप दे रहे हैं. किसी तरह से वोटर इधर से उधर न हो मतदाता असमंजस में हैं. उन्हें यह लग रहा है कि वोट के लिए कई रिश्तेदार घर पर आ चुके हैं. हालांकि, वे मन ही मन सोच रहे हैं कि वचन देने में क्या लगता है, जो आये सबको मदद का भरोसा दो. न जाने जीतने के बाद कौन प्रत्याशी कुछ काम आ जाये.
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