पांच साल से बेटे के इंतजार में तड़प रही बिजवंती

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एक मां का दर्द. चांद पुलिस ने दर्ज नहीं की थी प्राथमिकी, अब एसपी पर टिका है भरोसा भभुआ (सदर) : चांद थाना क्षेत्र के सिरहिरा गांव की बिजवंती पांच साल से अपने कलेजे के टुकड़े के लिए तड़प रही हैं. आज उसकी कोई सुनने वाला नहीं. नौकरी दिलाने के नाम पर पांच साल पहले […]

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एक मां का दर्द. चांद पुलिस ने दर्ज नहीं की थी प्राथमिकी, अब एसपी पर टिका है भरोसा
भभुआ (सदर) : चांद थाना क्षेत्र के सिरहिरा गांव की बिजवंती पांच साल से अपने कलेजे के टुकड़े के लिए तड़प रही हैं. आज उसकी कोई सुनने वाला नहीं. नौकरी दिलाने के नाम पर पांच साल पहले बिजवंती के छोटे बेटे को गांव के ही दो लोग गुजरात लेकर गये.
पांच साल बीत जाने के बाद उसकी बूढ़ी मां बिजवंती को ना बेटे के कमाये रुपये मिले, न ही उसकी कोई खबर. अपने बेटे की तड़प में वह गांव से नौकरी दिलाने के नाम पर ले जानेवाले लोगों से उसका पता या उसे वापस बुलाने की बात कहती हैं, तो वे लोग बिजवंती से 50 हजार रुपये की मांग करते हैं. कोई सहारा नहीं होने की स्थिति में बिजवंती अपने बेटे को बुलाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं.
दरअसल सिरहिरा की 65 वर्षीय बिजवंती के पति रामसूरत राम की मृत्यु 10 वर्ष पूर्व हो गयी. तीन बेटों में से एक बेटे सत्येंद्र राम की पिछले वर्ष अज्ञात बीमारी के कारण मौत हो गयी. बड़ा बेटा धर्मेंद्र उसके साथ है, लेकिन बिजवंती की बदकिस्मती कहें कि वह भी मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण उसका सहारा बनने के बजाय बिजवंती ही उसके लिए सहारा है.
घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पांच वर्ष पूर्व बिजवंती के सबसे छोटे बेटे महेंद्र राम को 16 वर्ष की उम्र में गांव के ही दो लोग मुन्ना राम व मूरत राम नौकरी दिलाने के नाम पर गुजरात ले गये. साल दो साल बीतने के बाद जब महेंद्र का कोई अता-पता नहीं लगा, तो बिजवंती गुजरात ले जाने वाले उक्त दोनों लोगों से उसका पता पूछा व उसे बुलाने के लिए कहा. लेकिन, उसे बहला-फुसला कर ले जानेवाले लोग पहले तो टाल-मटोल करने लगे, लेकिन बाद में उसका पता बताने व बुलाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की. एक वर्ष पूर्व उसके मंझोले बेटे सत्येंद्र राम की मौत हो जाने पर भी महेंद्र नहीं आया, तो उसे किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी. वह इसकी फरियाद लेकर चांद थाने पर गयी.
यहां इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं हुई.हर तरफ से निराश बिजवंती गुरुवार को एसपी हरप्रीत कौर के जनता दरबार में पहुंचीं और बेटे को वापस बुलवाने की फरियाद लगायी. बिजवंती बताती हैं कि पति और मंझोले बेटे की मौत के बाद महेंद्र ही एक मात्र सहारा है. बड़ा बेटा धर्मेंद्र मानसिक रूप से विक्षिप्त है. घर में कोई कमानेवाला नहीं है. किसी तरह मजदूरी कर बिजवंती अपना व अपने बड़े बेटे धर्मेंद्र का पालन पोषण कर रही है.
आज भी अपने कलेजे के टुकड़े महेंद्र का इंतजार कर रही है कि वह एक न एक दिन जरूर वापस आयेगा और उसके बुढापे की लाठी बनेगा.
पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल : इस पूरे घटना ने पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर बिजवंती के थाने पर जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी ? कहीं महेंद्र मानव तस्करी का शिकार तो नहीं हो गया है या महेंद्र अब जिंदा है या नहीं, यह तमाम सवाल अब सामने खड़े हैं.
क्या कहती हैं एसपी : एसपी हरप्रीत कौर ने बताया कि बिजवंती के आवेदन पर तत्काल चांद थाने को प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों पर कार्रवाई एवं महेंद्र को खोज निकालने का आदेश जारी कर दिया गया है.
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