तलाकशुदा व परित्यक्ता योजना का नहीं मिल पा रहा लाभ

By Prabhat Khabar Digital Desk
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भभुआ सदर : बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा चलाये जा रहे अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता और तलाकशुदा कल्याण योजना का जिले में बुरा हाल है. प्रचार-प्रसार के अभाव में मुस्लिम महिलाओं के लिए चलायी जा रही सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है.

विभाग के आंकड़ों पर भी गौर करें, तो इसकी स्थिति पता चलती है कि 2017 से चल रही इस योजना में अबतक जिले के मात्र छह मुस्लिम अल्पसंख्यक महिलाएं ही लाभ प्राप्त कर सकी है. जबकि, जिले में ऐसी दर्जनों अल्पसंख्यक महिलाएं हैं, जिनके पति या तो मानसिक रूप से दिव्यांग हैं या तलाक दे चुके हैं. अब ऐसी महिलाएं जानकारी के अभाव में सरकार के इस लाभ से वंचित हो रही हैं.
18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को मिलता है लाभ : इस योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की परित्यक्ता व तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को लाभ मिलना है. इसके लिए महिलाओं को जिला अल्पसंख्यक कल्याण के दफ्तर में आवेदन देना होता है. आवेदन देने के बाद जिला स्तरीय कऐटी द्वारा आवेदनों की जांच-पड़ताल की जाती है और फिर वैसी जरूरतमंद महिलाओं का अनुमोदन पात्रता के लिए विभाग से कर दिया जाता है.
आवेदनों की जांच कर दिया जा रहा है लाभ : जिले में सुस्त गति से चल रही इस योजना के संबंध में प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी सत्य प्रकाश नारायण का कहना था कि विभाग में आये आवेदनों की जांच करा वैसी महिलाओं को लाभ प्रदान किया गया है. प्रचार-प्रसार की योजना बनायी जा रही है. इस योजना के लिए आवेदन दिये जाते हैं, तो लाभ अवश्य प्रदान किया जायेगा.
प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों को जानकारी नहीं
2017 से इस योजना में अबतक मात्र छह जरूरतमंद महिलाओं को मिला लाभ
अल्पसंख्यक महिलाओं को मिलते हैं एकमुश्त 25 हजार रुपये
आत्मनिर्भरता के लिए 25 हजार रुपये देने का है प्रावधान
गौरतलब है कि अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता व तलाकशुदा योजना के तहत बेसहारा मुस्लिम महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए सरकार के कल्याण विभाग के द्वारा 25 हजार रुपये देने का प्रावधान है.
हालांकि, पूर्व में इस योजना के तहत मुस्लिम अल्पसंख्यक महिलाओं को 10 हजार की सहायता राशि दी जाती थी. लेकिन, वर्ष 2018 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने राशि में बढ़ोतरी करते हुए इसमें 25 हजार रुपये देने का प्रावधान कर दिया. विभाग इस योजना से वैसी महिलाओं की मदद व समाज में आगे बढ़ाने की कोशिश करता है, जो पति के दिव्यांग होने या तलाक दे देने से आर्थिक रूप से कमजोर हो गयी हों.
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