सरकारी अस्पतालों में 1099 एंबुलेंस सेवा बंद

Updated at : 07 Aug 2018 5:12 AM (IST)
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सरकारी अस्पतालों में 1099 एंबुलेंस सेवा बंद

एंबुलेंस चालक व ईएमटी आ गये सड़क पर भभुआ सदर : सरकारी अस्पतालों में सरकार स्तर से चलाये जानेवाले 1099 एंबुलेंस फिलहाल बंद हो गयी है. भभुआ के सदर अस्पताल में चलनेवाली 1099 एंबुलेंस के बंद होने के संबंध में पता चला है कि सरकार स्तर से इसकी कार्यदायी संस्था सम्मान फाउंडेशन का करार इसी […]

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एंबुलेंस चालक व ईएमटी आ गये सड़क पर

भभुआ सदर : सरकारी अस्पतालों में सरकार स्तर से चलाये जानेवाले 1099 एंबुलेंस फिलहाल बंद हो गयी है. भभुआ के सदर अस्पताल में चलनेवाली 1099 एंबुलेंस के बंद होने के संबंध में पता चला है कि सरकार स्तर से इसकी कार्यदायी संस्था सम्मान फाउंडेशन का करार इसी महीने तीन अगस्त को खत्म हो गया. इसके चलते सरकारी अस्पताल में 1099 एंबुलेंस खड़ी हो गयी और इसमें कार्य करनेवाले चालक व ईएनटी सड़क पर आ गये. सदर अस्पताल से मिले सूत्रों से पता चला है कि सम्मान फाउंडेशन के तहत ही अस्पतालों में 102 एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की जा रही है और इसका भी करार खत्म हो चुका है या फिर होनेवाली है, जिसके चलते 1099 की तरह इसकी भी पहिया कभी भी थम सकती है.
घायल मरीज को वाराणसी ले जाने में होती रही झिक-झिक : सदर अस्पताल में 1099 के बंद हो जाने से मरीज और एंबुलेंस के कर्मचारियों से झिक-झिक होने लगी है. सोमवार को ट्रैक्टर की चपेट में आये एक व्यक्ति को जब सदर अस्पताल से वाराणसी रेफर किया गया, तो घायल के परिजन एंबुलेंस के लिए इधर से उधर दौड़ लगाते रहे. किसी तरह से 102 एंबुलेंस वाराणसी जाने को तैयार हुआ, तो मरीज के परिजनों से एंबुलेंस कर्मियों से बकझक होने लगी. हालांकि, घायल को 102 एंबुलेंस से ही वाराणसी भेजा गया. लेकिन, एंबुलेंस की अस्पताल में हो रही कमी से आनेवाले समय में समस्या और बढ़ सकती है.
घायलों और गर्भवती को ज्यादा परेशानी : एंबुलेंस की कमी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हर रोज सड़क दुर्घटनाओं में घायल होनेवाले मरीजों और गर्भवती महिलाओं को हो रही है. जबकि, राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि गर्भवती महिलाओं को प्रसूति के लिए घर से लाने और प्रसूति के बाद पहुंचाने के लिए 24 घंटे नि:शुल्क एंबुलेंस उपलब्ध करवायी जायेगी. लेकिन, अब एंबुलेंस की कमी के कारण गर्भवती के परिजन नियंत्रण कक्ष में फोन करते रह जाते हैं. लेकिन, एंबुलेंस नहीं पहुंचती. इसके बाद परिजनों को उन्हें खुद ही लाना और ले जाना पड़ रहा है. सड़क दुर्घटना होने की स्थिति में घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती. इससे कई बार घायलों की जान भी चले जाने की संभावना रह रही है.
चालकों व ईएमटी को नहीं मिला है नौ महीने का भुगतान : इधर, एंबुलेंस सुविधा बंद हुई, तो साथ में एंबुलेंस चलाने वाले अनुबंध पर बहाल चालकों व मरीज को एंबुलेंस पर चिकित्सा सहायता देनेवाले इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) का नौ महीने का भुगतान भी बंद हो गया. 1099 में सेवा देनेवाले चालक सुनील सिंह, धनंजय तिवारी, ईएमटी मुंदर पांडेय ने बताया कि सदर अस्पताल में जुलाई महीने तक एंबुलेंस चलाया. लेकिन, अक्तूबर से ही उनलोगों का अनुबंधित वेतन भुगतान बंद है. चालकों के अनुसार, सम्मान संस्था द्वारा तीन महीने तक वेतन देने के अलावे पीएफ के लिए भी रुपये काटे गये थे. उसके बाद सभी का पीएफ कटना बंद हो गया और नौ महीने से संस्था ने वेतन भी बंद कर रखा है. उनका कहना था कि राज्य स्वास्थ्य समिति से संपर्क करने पर वहां बताया गया कि भुगतान अस्पताल से ही मिलेगा. हालांकि, इस मामले में एंबुलेंस बंद होने से बेकार हुए कर्मियों का कहना था कि सीएस द्वारा आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही उनकी समस्याओं पर विचार करते हुए इसका उपाय ढूंढा जायेगा.
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