जमुई में जमाबंदी में हेराफेरी का आरोप, 85 डिसमिल जमीन ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक एकड़ कैसे हुई? जांच शुरू
अंचल कार्यालय में परिवार सदस्यों के साथ आवेदन देने जाते शिकायतकर्ता | Prabhat Khabar Network
डुमरी मौजा में जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी का गंभीर आरोप लगा है. खतियान में दर्ज 85 डिसमिल जमीन को ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक एकड़ कर दिया गया. इस मामले में अंचल कार्यालय और राजस्व कर्मचारी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
Bihar land mutation: जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रकबे में बदलाव का एक मामला सामने आने के बाद सोनो अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. डुमरी खास मौजा में खतियान में दर्ज 85 डिसमिल गैरमजरुआ जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड में परिमार्जन कर रकबा एक एकड़ किए जाने का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ता हीरा पांडेय ने मामले में कथित तौर पर जमाबंदी कायम करने, जमीन की बिक्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.
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मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि शिकायत में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन के रकबे में बदलाव से लेकर बिक्री के बाद जमाबंदी और दाखिल-खारिज तक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
खतियान में 85 डिसमिल, ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक एकड़
हीरा पांडेय के अनुसार लखनकियारी पंचायत के डुमरी खास मौजा में खाता संख्या 180 और खेसरा संख्या 20 की जमीन मूल खतियान में 85 डिसमिल दर्ज है. शिकायत में जमीन की प्रकृति परती कदीम खतियानी रैयत गैरमजरुआ भत्तेदार बतायी गयी है.
आरोप है कि बाद में ऑनलाइन रिकॉर्ड में परिमार्जन कर जमीन का रकबा 85 डिसमिल से बढ़ाकर एक एकड़ कर दिया गया. शिकायतकर्ता ने इसी बदलाव को पूरे मामले का अहम बिंदु बताते हुए रिकॉर्ड में किए गए परिमार्जन की जांच की मांग की है.
बिना स्पष्ट आदेश के जमाबंदी कायम करने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि उक्त जमीन की जमाबंदी विद्या सिंह के नाम जमाबंदी संख्या 1276/690, पंजी-II में कायम कर दी गयी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमाबंदी कायम करने के लिए अंचल कार्यालय का कोई स्पष्ट आदेश या संतोषजनक दस्तावेज मौजूद नहीं है.
हीरा पांडेय ने राजस्व कर्मचारी की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि पूरे मामले में सरकारी रिकॉर्ड में किए गए बदलाव और बाद की राजस्व प्रक्रिया की जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्ड में परिवर्तन किस आधार पर किया गया.
जमीन बिकने के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर भी सवाल
शिकायत के अनुसार उक्त जमीन के एक हिस्से की बिक्री दस्तावेज संख्या 6793 के माध्यम से 2 दिसंबर 2025 को की गयी थी. इसके बाद कथित तौर पर जमाबंदी में सुधार कराया गया और दाखिल-खारिज वाद संख्या 2041/96-2025-26 के तहत प्रक्रिया पूरी कर दी गयी.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन न तो कथित विक्रेता के कब्जे में थी और न ही क्रेता के कब्जे में. इसके बावजूद रिकॉर्ड में बदलाव करते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की गयी.
हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
जांच में सामने आएगा रिकॉर्ड में बदलाव का सच
हीरा पांडेय ने सीओ से क्रेता और विक्रेता के नाम कायम जमाबंदी को रद्द करने की मांग की है. इसके साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में किए गए परिमार्जन की जांच कराने और राजस्व कर्मचारियों तथा भू-मापी से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की गयी है.
शिकायतकर्ता ने मामले को जिले के वरीय अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया है. सीओ के अलावा जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक के कई वरीय पदाधिकारियों को भी आवेदन भेजे जाने की बात कही गयी है.
राजस्व पदाधिकारी बोले- गलत हुआ तो जमाबंदी होगी रद्द
मामले में राजस्व पदाधिकारी सरयू मंडल ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित राजस्व कर्मचारी ब्रजकिशोर पांडेय से स्पष्टीकरण मांगा गया है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है.
राजस्व पदाधिकारी के अनुसार, यदि जांच में जमाबंदी गलत तरीके से कायम किया जाना पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जाएगा.
अब जांच में यह सामने आना अहम होगा कि मूल खतियान में दर्ज 85 डिसमिल जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा एक एकड़ कैसे दर्ज हुआ, जमाबंदी किस आधार पर कायम की गयी और बिक्री के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गयी.
Bihar land mutation: आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
जमीन के रिकॉर्ड में रकबा, जमाबंदी और दाखिल-खारिज जैसी प्रविष्टियां किसी भी भू-स्वामी के अधिकार से सीधे जुड़ी होती हैं. ऐसे में रिकॉर्ड में कथित बदलाव का असर केवल एक जमीन तक सीमित नहीं रहता. इससे जमीन की खरीद-बिक्री, कब्जे और भविष्य के स्वामित्व विवादों पर भी असर पड़ सकता है.
इसी वजह से शिकायतकर्ता ने पूरे रिकॉर्ड की जांच के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग की है. अब लोगों की नजर जांच की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है.
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