सोनो में 24 लाख से बना कमली जोर आहर बांध टूटा, 10 एकड़ धान की फसल पर संकट, ग्रामीणों ने जांच की मांग की
बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से को देखते ग्रामीण. | Prabhat Khabar Network
सोनो प्रखंड के थम्हन गांव में कमली जोर आहर बांध का एक हिस्सा लगातार बारिश से टूट गया है. इससे 10 एकड़ से अधिक धान की फसल डूबने का खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों ने जीर्णोद्धार की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तत्काल मरम्मत और जांच की मांग की है.
सोनो प्रखंड की थम्हन पंचायत के दूरस्थ पश्चिमी क्षेत्र स्थित थम्हन गांव में कमली जोर आहर बांध पर खतरा मंडरा रहा है. लगातार हुई बारिश के बाद पानी के तेज बहाव के बीच बांध का एक तरफ का करीब आधा हिस्सा टूट गया है. क्षतिग्रस्त भाग की मिट्टी लगातार भरभराकर गिर रही है, जिससे पानी के रिसाव का खतरा बढ़ गया है. बांध के बाकी हिस्से पर भी पानी का दबाव बना हुआ है. ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बांध का बचा हुआ हिस्सा भी टूट गया तो 10 एकड़ से अधिक जमीन में लगी धान की फसल बर्बाद हो सकती है.
आपके शहर में
आधा बांध टूटा, बाकी हिस्से पर भी पानी का दबाव
ग्रामीणों के अनुसार बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से से मिट्टी लगातार गिर रही है. आसपास कई जगहों पर दरारें भी पड़ गई हैं. पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण आहर में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बांध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी बड़े नुकसान का इंतजार करना उचित नहीं होगा. विभाग को तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू करना चाहिए.
धान की फसल डूबने की आशंका से किसानों में चिंता
आहर में पानी का स्तर अधिक होने के कारण आसपास के खेतों में लगी धान की फसल पहले से ही प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों को आशंका है कि बांध का बचा हुआ हिस्सा टूटने पर करीब 10 एकड़ जमीन में लगी धान की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो सकती है. इसके अलावा आसपास के अन्य खेतों और गांवों में भी पानी फैलने का खतरा है. इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

ग्रामीण राकेश कुमार, दुखन यादव, रंजीत कुमार, पंकज साह, बनारसी कुमार, मुन्ना कुमार और रुपेश कुमार ने बांध के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि आहर निर्माण में मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया, जिसके कारण बांध पानी का दबाव नहीं झेल पा रहा है. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराने और पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है.
वर्ष 2025 में हुआ था 24 लाख रुपये की लागत से जीर्णोद्धार
ग्रामीणों के अनुसार लघु जल संसाधन विभाग की ओर से लघु सिंचाई प्रमंडल द्वारा कमली जोर आहर का जीर्णोद्धार करीब 24 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2025 में कराया गया था. निर्माण कार्य पूरा होने के एक वर्ष बाद ही बांध के क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, गुणवत्ता की जांच तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है.
तत्काल मरम्मत और जांच की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि बांध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए विभाग को बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू करना चाहिए. साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि बांध इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त क्यों हुआ. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों की फसल के साथ-साथ आसपास के गांवों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए