योगेंद्र ने बढ़ाया जमुई व सिमुलतला का मान
Updated at : 03 Jan 2020 9:23 AM (IST)
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सिमुलतला : कौन कहता है कि आसमानों में सुराग नही होते, एक पत्थर तो दिल से उछालो यारो…. इस कहावत को सच कर दिखाया है सिमुलतला के योगेंद्र यादव ने दरअसल पश्चिम बंगाल के आसनसोल में आयोजित इण्डोनेपाल अंतराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सिमुलतला के योगेंद्र यादव ने ना सिर्फ सिमुलतला व जमुई […]
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सिमुलतला : कौन कहता है कि आसमानों में सुराग नही होते, एक पत्थर तो दिल से उछालो यारो…. इस कहावत को सच कर दिखाया है सिमुलतला के योगेंद्र यादव ने दरअसल पश्चिम बंगाल के आसनसोल में आयोजित इण्डोनेपाल अंतराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सिमुलतला के योगेंद्र यादव ने ना सिर्फ सिमुलतला व जमुई का मान बढ़ाया है बल्कि बिहार एवं बिहारियों को भी गौरवान्वित होने का अवसर दिया है.
इस उपलब्धि पर सिमुलतला क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई दी है. जानकारी के अनुसार कि आसनसोल के इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 29 दिसंबर को हुई थी प्रतियोगिता का समापन 31 दिसंबर को हुई. इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में योगेंद्र ने कई प्रतिभागियों को पछाड़कर इस पदक को प्राप्त किया है.
बताते चलें कि योगेंद्र सिमुलतला थाना क्षेत्र के बस्तियाडीह गांव के निवासी है उनके पिता शिवन यादव एक ग्रामीण किसान है माता गिरसी देवी गृहणी है, इनकी प्रारंभिक पढ़ाई राधा मेमोरियल एकेडमी सिमुलतला से हुई थी. इन्होंने उच्च विद्यालय टेलवा बाजार से सन 2014 में मैट्रिक की परीक्षा पास किया. एक माध्यम वर्गीय किसान परिवार होने के कारण घर की माली हालत बहुत अच्छी नही थी, लिहाजा योगेंद्र आगे की पढ़ाई नही कर पाया.
बचपन से इन्हें ताइक्वांडो एवं कुंफ़ू चम्पियन बनने का सपना था. अपने परिवार को आर्थिक मदद देने के खयाल से योगेंद्र मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़कर गुजरात के सूरत शहर काम करने की मंशा को लेकर गया. जहां उन्होंने एक कंपनी में काम भी किया और सूरत के ही बुद्धिष्ट कुंगफू फेडरेशन ऑफ इंडिया नामक प्रशिक्षण संस्थान में ताइक्वांडो एवं कुंफ़ू का प्रशिक्षण लिया.
इतना ही नही प्रशिक्षण के बाद उसी संस्थान में इन्होंने प्रषिक्षक के रूप में काम भी किया. घर वापस आने के बाद योगेंद्र ने स्थानीय स्तर पर युवाओं, छात्रों एवं छात्राओं में इस कला की प्रशिक्षण देने की ठानी. वर्तमान में इनके द्वारा जिले के चकाई, सोनो, सरौन, सिमुलतला आदि क्षेत्रों में संचालित लगभग एक दर्जन विद्यालयों में छात्र छात्राओं को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दिया भी जा रहा है.
इतनी संघर्ष के बाद इस मुकाम तक पहुंचने वाले योगेंद्र की अबतक कोई पहचान नही थी लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्होंने अपना परचम लहराया की लोग इनकी सराहना करते नही थक रहे है. पत्रकारों से बातचीत में योगेंद्र ने कहा कि मेरी मंजिल अभी और आगे है मै विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की टीमों के विजेता बनाना चाहता हूं लेकिन अबतक का जो मेरा सफर रहा काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, मैंने चुनौतियों से कभी मुह नही मोड़ा, हमेशा चुनौतियों को स्वीकार किया. सायद इसी मेहनत का नतीजा है जो आज मैं इस स्थान तक पहुंच पाया हूं.
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