गोपालगंज में NH-727B भूमि अधिग्रहण में फंसे किसान, एलपीसी-जमाबंदी के लिए काट रहे दफ्तरों के चक्कर

Author Suresh rai|Edited by Vivek Ranjan
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निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग 727 बी | Prabhat Khabar Network

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राष्ट्रीय राजमार्ग 727बी के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी किसानों की समस्याएं डेढ़ महीने बाद भी अनसुलझी हैं. विशेष कैंप के बाद भी एलपीसी, परिमार्जन और जमाबंदी जैसे मुद्दे लंबित हैं, जिससे किसान मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं.

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Gopalganj News: राष्ट्रीय राजमार्ग 727बी के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासनिक दावे अब सवालों के घेरे में हैं.

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राजकीय प्राथमिक विद्यालय, भानपुर में लगाया गया 10 दिवसीय विशेष कैंप समाप्त हुए डेढ़ महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन किसानों की एलपीसी, परिमार्जन, जमाबंदी और हिस्सेदारी से जुड़ी समस्याओं का अब तक समाधान नहीं हो सका है.

धान रोपनी के सीजन में किसान प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझकर मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं.

कैंप में जमा किए थे आवेदन, अब तक नहीं हुआ निष्पादन

27 मई को समाप्त हुए विशेष कैंप में भानपुर, मिश्रौलिया और मलचौर सहित आसपास की पंचायतों के दर्जनों किसानों ने जमीन से जुड़े दस्तावेज और आवेदन जमा किए थे.

किसानों को उम्मीद थी कि कैंप के माध्यम से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा, लेकिन लंबित मामलों के कारण उनकी परेशानी कम नहीं हुई है.

नौकरी छोड़ गांव में रहने को मजबूर किसान

मलचौर निवासी किसान राजू गोंड ने बताया कि उनकी करीब आठ कट्ठा जमीन अधिग्रहण की जद में आई है.

उन्होंने बताया कि वह अहमदाबाद की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं, लेकिन पिछले दो महीने से कागजी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए गांव में ही रुकने को मजबूर हैं.

इस कारण उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

खेती का काम भी प्रभावित

भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की अनिश्चितता के कारण कई किसान अपने खेतों में धान की रोपनी नहीं करा पा रहे हैं.

किसानों को आशंका है कि कभी भी निर्माण कार्य शुरू हो सकता है, जिससे खेती प्रभावित हो जाएगी.

वहीं, किसान संतभगवान भगत ने बताया कि लंबे समय तक अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद आखिरकार आजीविका के लिए उन्हें गुजरात लौटना पड़ा.

राजस्व कर्मियों पर लापरवाही का आरोप

प्रभावित किसानों का आरोप है कि अंचल कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है.

किसानों का कहना है कि संबंधित राजस्व कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार फोन तक रिसीव नहीं किया जाता.

तबादले के कारण प्रभावित हुआ काम : सीओ

मामले को लेकर अंचलाधिकारी अनुभव कुमार राय ने बताया कि हाल में कई राजस्व कर्मचारियों के तबादले के कारण फाइलों के निष्पादन में देरी हुई है.

उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए कार्य किया जा रहा है. जुलाई महीने के अंत तक सभी लंबित आवेदनों का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसानों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके.

उठ रहे सवाल

  • विशेष कैंप लगाकर तत्काल समाधान का निर्देश देने के बावजूद डेढ़ महीने बाद भी मामले लंबित क्यों हैं?
  • कर्मचारियों के तबादले का खामियाजा किसानों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
  • खेती और रोजगार छोड़कर कार्यालयों के चक्कर लगाने को किसान क्यों मजबूर हैं?

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