खिजरसराय में एक रुपये किलाे टमाटर फिर भी नहीं मिल रहे खरीदार

खिजरसराय: सब्जी की खेती को मुनाफे की खेती व नगदी फसल माना जाता है, लेकिन मौसम में बार-बार आ रहे बदलाव व वातावरण की परिस्थितियों के कारण यह भी घाटे का सौदा हो जाता है. एक तरफ धान व गेहूं की खेती से खार खाये किसान इस आेर ध्यान देते हैं, तो यहां भी निराशा […]
खिजरसराय: सब्जी की खेती को मुनाफे की खेती व नगदी फसल माना जाता है, लेकिन मौसम में बार-बार आ रहे बदलाव व वातावरण की परिस्थितियों के कारण यह भी घाटे का सौदा हो जाता है. एक तरफ धान व गेहूं की खेती से खार खाये किसान इस आेर ध्यान देते हैं, तो यहां भी निराशा हाथ लगती है व लागत पूंजी भी नहीं लौट पाती है. यही हाल कैथबिगहा, लोदीपुर, वसन बिगहा के किसानों का है. इस बार टमाटर की अच्छी फसल हुई, लेकिन लागत के साथ मजदूरी निकलना मुश्किल है.
शुक्रवार को खिजरसराय मंडी में एक रुपये किलो के हिसाब से टमाटर बेचा जा रहा था. उसमें भी ख़रीदार नहीं मिल रहे थे. दर्जनों किसानों को अपनी फसल लौटा कर ले जाना पड़ा. एक तो सुबह से उठ कर टमाटर तोड़ने से लेकर बाजार तक लाये और नहीं बिकने पर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखायी पड़ने लगती हैं.
बैंगन भी बेहाल
कैथ बिगहा के किसान गोपाल कहते हैं कि इस बार टमाटर की फसल में नुकसान उठाना पड़ेगा. 10 दिनों बाद टमाटर की फसल भी खत्म हो जायेगी. गरमी के प्रभाव से फसल जल्दी तैयार हो गयी. लोदीपुर के किसान नरेश महतो ने बताया कि टमाटर ही नहीं बैंगन की भी स्थिति खराब है. सबसे बड़ी बात यह है कि उपज के बाद संधारण की कोई व्यवस्था नहीं है. अगर गया मंडी में बेचने जायें, तो भाड़ा भी नहीं निकल पायेगा. किसान रामाशीष प्रसाद कहते हैं कि फसल उत्पादन के बाद बाजार का अभाव भी हम किसानों को खलता है.
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