तीन हत्याएं : न किसी ने देखी, न किसी ने सुनी

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तीन हत्याएं : न किसी ने देखी, न किसी ने सुनी आसपास ही है मनोज रविदास के भाइयों का घर फोटो-वरीय संवाददाता, गयाराजपुर गांव में शुक्रवार की देर रात एक महिला व तीन बच्चों पर कातिलाना हमला हुआ. महिला व दो बच्चों की जान चली गयी. एक बच्चा अब भी मौत के बीच जूझ रहा […]

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तीन हत्याएं : न किसी ने देखी, न किसी ने सुनी आसपास ही है मनोज रविदास के भाइयों का घर फोटो-वरीय संवाददाता, गयाराजपुर गांव में शुक्रवार की देर रात एक महिला व तीन बच्चों पर कातिलाना हमला हुआ. महिला व दो बच्चों की जान चली गयी. एक बच्चा अब भी मौत के बीच जूझ रहा है. लेकिन, इतनी बड़ी घटना होने के बाद सबसे अचंभित करनेवाली बात है कि किसी ने न कुछ सुना और न ही कुछ देखा. परिजनों द्वारा लगाये गये आरोप में अब तक मनोज रविदास ने ही पत्नी व तीनों बच्चों पर टांगी से वार किया. लेकिन, मनोज के घर की उत्तर दिशा में पड़ोस में उसके बड़े भाई संजय रविदास व उनकी पत्नी उषा देवी और उनके चार बच्चे सोये थे. दक्षिण दिशा में पड़ोस में उनका कंझिला भाई टुनटुन रविदास, छोटा भाई प्रदीप रविदास व छोटी बहन पचिया कुमारी सोयी थी. दोनों भाइयों के घर की दीवारें मनोज के घर की पड़ोसी दीवार हैं. यहां तक कि मनोज व टुनटुन रविदास के घर बीच की दीवार सिर्फ चार फुट की है, यानी इस दीवार को फांद कर कोई भी व्यक्ति आसानी से एक घर से दूसरे घर में जा सकता है. लेकिन, सबकुछ इतना नजदीकी होते हुए भी शुक्रवार की देर रात मनोज दास के घर में कब क्या हुआ, इसकी भनक किसी को नहीं लगी.मनोज की भाभी उषा देवी ने बताया कि अगर जरा सी भी भनक मिल जाती, तो उनके घर के लोग दौड़ जाते. उनका देवर मनोज आये दिन अपनी पत्नी सुनैना से मारपीट करता रहता था. कई दफा उनके पति संजय, ससुर मोहन रविदास व अन्य परिजनों ने मनोज के घर का दीवार फांद कर पति-पत्नी के बीच उभरे विवाद को सुलझाया था. लेकिन, शुक्रवार की रात मनोज के घर में इतनी बड़ी घटना कब और कैसे हुई, किसी को कुछ पता नहीं चला. दादा के घर रहते, तो बच्चों की नहीं जाती जानउषा देवी ने बताया कि मनोज की हरकतों से परेशान होकर उनके बच्चे शोभा, डब्लू व बबलू अपने दादा मोहन रविदास के साथ सोते थे. बच्चों के दादा मनोज के साथ न रह कर अपने कंझिले बेटे टुनटुन रविदास व प्रदीप रविदास के साथ रहते थे. लेकिन, शुक्रवार को बच्चों के दादा अपने संझिले बेटे अनोज दास के साथ परैया थाने के गिरधारा गांव में एक रिश्तेदार के घर चले गये थे. इस कारण मनोज के बेटे अपने ही घर में सोये थे. हालांकि, शुक्रवार की शाम मनोज के बेटे डब्लू व बबलू ने दादा की खाट पर सोने की बात कही थी. लेकिन, पिता के गुस्सा करने की वजह से वे नहीं गये. अगर सुनैना चली जाती नैहर, तो बच जाती जानउषा ने बताया कि हाल के कुछ महीनों से मनोज की मानसिक स्थिति सही नहीं थी. वह आये दिन पत्नी के साथ मारपीट करता रहता था. एक दिन मारपीट करने पर गुस्से में उनके ससुर ने कहा कि आज मनोज का हाथ-पैर तोड़ देते हैं. उस दौरान मनोज की पत्नी सुनैना ने ही अपने ससुर से काफी आरजू-विनती की और कहा था कि अगर उनके पति का हाथ-पैर तोड़ देंगे, तो घर की जिम्मेवारी उसके कंधों पर ही आ जायेगी. इसके अलावा उसकी सेवा भी करनी पड़ेगी. उषा ने बताया कि विवाद होने के कारण की शुक्रवार की शाम सुनैना ने अपने बच्चों के साथ नैहर जाने का निर्णय ले लिया था. वह तैयार भी हो गयी. उसी बीच मनोज आ गया और सिर्फ एक रात रुकने को कहा. पति की बात मान कर वह रुक गयी, उसी रात को यह घटना हुई.

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