लीवर व पेट संबंधी बीमारियों को न करें नजरअंदाज : डॉ अवनीश

Published at :17 Sep 2018 8:22 AM (IST)
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लीवर व पेट संबंधी बीमारियों को न करें नजरअंदाज : डॉ अवनीश

गया : पेट में उत्पन्न होनेवाले विकार कई रोगों की जड़ होते हैं. सिरदर्द, बुखार, एसिडिटी, बदहजमी, चक्कर आना व उल्टी-दस्त आदि से लेकर पीलिया हेपेटाइटस, फैटी लीवर जैसी बीमारियां भी पेट में मामूली शिकायतों के बाद आज-कल सामने आ रही हैं. पेट में गड़बड़ी के बाद बवासीर, शुगर व बीपी के अलावा कैंसर जैसी […]

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गया : पेट में उत्पन्न होनेवाले विकार कई रोगों की जड़ होते हैं. सिरदर्द, बुखार, एसिडिटी, बदहजमी, चक्कर आना व उल्टी-दस्त आदि से लेकर पीलिया हेपेटाइटस, फैटी लीवर जैसी बीमारियां भी पेट में मामूली शिकायतों के बाद आज-कल सामने आ रही हैं. पेट में गड़बड़ी के बाद बवासीर, शुगर व बीपी के अलावा कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की चपेट में भी लोग आ रहे हैं.
इसलिए पेट व लीवर से संबंधित बीमारियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह जानकारी पेट व गैस्ट्रो एन्ट्रोलॉजी रोग के विशेषज्ञ एमडी/डीएम डॉ अवनीश कुमार ने प्रभात खबर संवाददाता से विशेष बातचीत के दौरान दी. वह शहर के जीबी रोड में जयप्रकाश नारायण अस्पताल के सामने स्थित इंदुब्रज चाइल्ड एंड गैस्ट्रो केयर में हर रविवार को लोगों को अपनी सेवा दे रहे हैं. पटना स्थित रूबन अस्पताल में कार्यरत डाॅ अवनीश ने बताया कि पेट व लीवर से संबंधित गंभीर बीमारियों से खान-पान में सावधानी बरत कर बचा जा सकता है.
पेट संबंधी रोग प्रारंभिक अवस्था में सही इलाज कराने पर जड़ से भी खत्म हो सकते हैं. साथ ही इससे होनेवाली दूसरी बीमारियों से भी बचा जा सकता है. लेकिन, यदि बीमारी शरीर में लंबे समय तक रहेगी, तो जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसलिए पेट रोग से संबंधित किसी तरह की शिकायत मिलने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए, न कि अपने स्तर से दवा खाकर रोग को दबाना चाहिए. उन्होंने बताया कि दवा खाकर रोग को दबाने से उसे बढ़ने का खतरा बना रहता है.
लीवर से संबंधित रोगों के प्रारंभिक लक्षण
लीवर से संबंधित रोगों के प्रारंभिक लक्षण के विषय में पूछने पर इंदुब्रज चाइल्ड एंड गैस्ट्रो केयर के बतौर संचालक डॉ अवनीश बताते हैं कि ऐसे रोगों के शुरुआती दौर में त्वचा व आंखों में पीलापन, त्वचा में खुजली, मूत्र का गहरा रंग, गहरे रंग का मल, मल में खून आना, भूख कम लगना, पेट में दर्द होना, पेट फूलने लगाना, पेट में जलन होना व पाखाना साफ नहीं होना आदि प्रमुख लक्षण हैं. जब इस तरह के लक्षण का अनुभव हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.
खान-पान में सावधानी बरतने व नियमित व्यायाम करने से ऐसे रोगों से बचा जा सकता है. इसके लिए तैलीय व मसालायुक्त पदार्थों का सेवन कम करना होगा. परहेज करने से इस रोग से बचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि दाल व रेशेदार फलों, हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करने से कई बीमारियों के होने की आशंका काफी कम हो जाती है. इसके बावजूद लीवर संबंधी कोई शिकायत होती है, तो सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क कर दवाओं का सेवन शुरू कर देना चाहिए. इससे बीमारी पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है.
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