जमीनी हकीकत: गंदे पानी में तैरकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे, जलजमाव पर सो रहा प्रशासन

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बर्निया गांव में सड़क पर जमे पानी से गुजरते राहगीर | Prabhat Khabar Network

बरनियां गांव में स्कूल जाने वाला रास्ता महीनों से जलमग्न है. बच्चे पैंट मोड़कर और चप्पल हाथ में लेकर गंदे पानी से होकर विद्यालय पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी कराने की मांग की है.

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जमीनी हकीकत: कुशेश्वरस्थान पूर्वी के इटहर पंचायत के बरनियां गांव में स्कूल जाने का रास्ता बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बरनियां और उच्च विद्यालय बरनियां जाने वाले छात्र-छात्राओं को रोज घुटने भर गंदे और सड़े पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है. स्कूल के आसपास और गांव के पश्चिम-दक्षिण टोले में महीनों से जलजमाव है. जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों के साथ बच्चों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है.

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किताब हाथ में, रास्ते में गंदा पानी

सुबह स्कूल जाने के समय बच्चों के सामने पढ़ाई से पहले जलजमाव पार करने की चुनौती होती है. सातवीं कक्षा के प्रिंस, नौवीं के पीयूष, चितरंजन और आलोक, छठी के अभिराज, चौथी के रिशव और आठवीं की साक्षी समेत सैकड़ों बच्चे पैंट मोड़कर और चप्पल हाथ में लेकर बदबूदार पानी से गुजरते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक गंदे पानी में चलने के कारण कई बच्चों के पैरों में घाव हो गये हैं. खुजली और जलन की शिकायत भी रहती है. संक्रमण के डर से कुछ बच्चे स्कूल जाने से भी कतराने लगे हैं.

शिक्षकों को भी पानी से होकर पहुंचना पड़ रहा स्कूल

जलजमाव की समस्या सिर्फ छात्र-छात्राओं तक सीमित नहीं है. शिक्षकों को भी इसी रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार, लगातार जलजमाव के कारण विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है.

अभिभावक राजेश, प्रवीण, रजनीकांत, मोहित राय, जोगेन्द्र राय, रोशन राय, इंदल सदा और सोनू राय ने कहा कि बच्चों के हाथ में किताब है, लेकिन स्कूल जाने का रास्ता पानी में डूबा है. बच्चों को स्कूल भेजने पर बीमारी का डर रहता है और घर पर रखने पर पढ़ाई छूटने की चिंता बनी रहती है.

तीन हजार आबादी वाले गांव में स्थायी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों के अनुसार बरनियां गांव की आबादी करीब तीन हजार है और यहां 841 मतदाता हैं. उनका आरोप है कि हर चुनाव में विकास के वादे किये जाते हैं, लेकिन जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है.

बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है. घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से दुर्गंध के साथ संक्रमण का खतरा भी बना रहता है.

पंपसेट और नाला निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पंपसेट लगाकर जलनिकासी कराने की मांग की है. साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बने, इसके लिए स्थायी समाधान के तौर पर नाला निर्माण कराने की मांग रखी है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द जलजमाव की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे बच्चों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे. अब देखना है कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कब तक कदम उठाता है.

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