डीएमसीएच में खून का खेल जांच की हुई सिर्फ खानापूरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 May 2017 6:00 AM (IST)
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दरभंगा : डीएमसीएच के मेडिसीन विभाग में भर्ती मरीज के परिजन से खून दिलाने बदले अस्पताल के ही एक कर्मचारी द्वारा छह हजार रुपये लेने मामले में अस्पताल प्रशासन महज एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पर निलंबन की कार्रवाई कर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. अस्पताल प्रशासन यह भी पता करने की जहमत नहीं […]
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दरभंगा : डीएमसीएच के मेडिसीन विभाग में भर्ती मरीज के परिजन से खून दिलाने बदले अस्पताल के ही एक कर्मचारी द्वारा छह हजार रुपये लेने मामले में अस्पताल प्रशासन महज एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पर निलंबन की कार्रवाई कर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. अस्पताल प्रशासन यह भी पता करने की जहमत नहीं उठायी कि आखिर लाल खून के काला खेल का रैकेट का असली संचालक कौन है? रैकेट में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं?
साथ ही क्षेत्रीय रक्त अधिकोष से मरीजों से पैसे लेकर कैसे खून का सप्लाई किया जाता है. इस रैकेट में क्षेत्रीय रक्त अधिकोष के किस कर्मी का हाथ है. सूत्रों की मानें तो अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण आज भी धड़ल्ले से रक्त अधिकोष से खून का कारोबार चल रहा है. हाल यह है कि आज भी जरूरतमंद मरीज व उनके परिजन पैसे देकर खून खरीद रहे हैं.
कैसे हुआ था मामले का खुलासा
मेडिसीन विभाग में भर्ती विशनपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर रामपुर निवासी मरीज रामशंकर झा को तीन यूनिट ब्लड की जरूरत थी. उनकी पत्नी अहलाद देवी खून के लिए भटक रही थी. इस बीच अस्पताल के एक कर्मी ने उसे खून के बदले छह हजार रुपये की मांग की. पैसे नहीं रहने के कारण अहलाद देवी ने कर्ज लेकर पति के लिए किसी तरह एक यूनिट ब्लड का इंतजाम किया.
अहलाद के पास दूसरे यूनिट ब्लड के लिए पैसे नहीं थे. उसे कहीं से कर्ज भी नहीं मिल पा रहा था. अहलाद देवी इसके लिए अधीक्षक से मिली. उसने साफ कहा कि कर्ज लेकर एक यूनिट ब्लड का तो इंतजाम कर लिया, लेकिन उसके पास और पैसे नहीं हैं. अधीक्षक ने उसकी बात सुनकर लिखित आवेदन देने को कहा. आवेदन में उसने निश्चेतना विभाग में कार्यरत पुरूष कक्ष सेवक सुकेश मिश्र पर ब्लड के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया.
बता दें कि मामला का खुलासा होने के बाद अस्पताल अधीक्षक ने उपाधीक्षक डॉ. वालेश्वर सागर के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया था. वहीं प्रमंडलीय आयुक्त आरके खंडेलवाल ने संज्ञान लेते हुए प्राचार्य डॉ. आरके सिन्हा को जांच का जिम्मा सौंपा था.
प्रारंभिक जांच में सुकेश तो बच गया, पर हमीदुर पर हो गयी कार्रवाई
मामले की प्रारंभिक जांच में निश्चेतना विभाग में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारी सुकेश मिश्र तो बच गए.जांच के क्रम में सुकेश ने मरीज के साथ पुरानी दुश्मनी का हवाला देकर अपनी गर्दन बचा ली, लेकिन मो. हमीदुर रहमान फंस गए. बताया जाता है कि हमीदुर ने मोबाइल पर पैसे लेकर आने की बात कही थी. जांच के क्रम में हमीदुर का मोबाइल और उसकी आवाज की पहचान करने के बाद अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार मिश्र ने उन्हें निलंबित कर दिया.
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