महान है मिथिला व मैथिली : वीसी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Nov 2015 8:53 PM

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महान है मिथिला व मैथिली : वीसी पुस्तक लोकार्पण के क्रम में कुलपति ने कहीफोटो- 17परिचय- पुस्तक का लोकार्पण करते लनामिवि कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलानुशासक डा. अजय नाथ झा, अपर समाहर्त्ता रवींद्र कुमार दिवाकर व अन्यदरभंगा. मिथिला और मैथिली महान है. जो चीज मिथिला और मैथिली में नहीं है वो इस धरती में नहीं […]

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महान है मिथिला व मैथिली : वीसी पुस्तक लोकार्पण के क्रम में कुलपति ने कहीफोटो- 17परिचय- पुस्तक का लोकार्पण करते लनामिवि कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलानुशासक डा. अजय नाथ झा, अपर समाहर्त्ता रवींद्र कुमार दिवाकर व अन्यदरभंगा. मिथिला और मैथिली महान है. जो चीज मिथिला और मैथिली में नहीं है वो इस धरती में नहीं है. यहां की संस्कृति कम ही देखने को मिलती है. उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने मंगलवार को विवि के पीजी संगीत विभाग की ओर से आयोजित पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कही. उन्होंने कहा कि मिथिला में जीवन देने की संस्कृति है. यहां टूटन और बिछुड़ने का नहीं है. यह संस्कृति यहां के संगीत में भी विद्यमान है. यहां की धरती में प्रकृति, सौंदर्य एवं देवी मां का दर्शन छिपा हुआ है. प्रो. कुशवाहा ने कहा कि साक्ष्य की कमी के कारण ही मिथिला थोड़ा पीछे रह जाता है. पुस्तक लिखने का काम खुद भी करना चाहिए और दूसरों को भी प्रेरित करने की जरुरत है. महाकवि विद्यापति के संदर्भ उन्होंने कहा कि उनके संदर्भ में जो कुछ भी है वो बहुत थोड़ा और करने के लिए बहुत ज्यादा की जरुरत है. कुलपति कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. प्रो. कुशवाहा ने कहा कि संगीत विभाग में जीवन पनपता है. जिससे हम दिनानुदिन दूर होते जा रहे हैं. उसे सिलसिलेवार तरीके से साक्ष्य के रुप में लेखनी का उपयोग कर संजोने का काम करें. बतौर विशिष्ट अतिथि वरीय उपसमाहर्त्ता डा. रवींद्र कु मार दिवाकर ने कहा कि जन्म से मरण तक यात्रा शब्दों में तय की जाती रही है. उसे पुस्तक का रुप देकर पीजी संगीत विभाग ने एक सफल आयोजन किया है. उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति संगीत और साहित्य के पर्यायवाची रहे हैं. वे मिथिला ही नहीं बल्कि बंगला, असमिया, उडि़या सबों के लिए सभी भाषा के लिए विद्यापति उनके अपने कवि माने जाते हैं. विद्यापति साहित्यकार के अलावा संगीत के भी साधक थे. उन्होंने कहा कि लोकगीत एवं लोग संगीत हमारे रसों में बसा है. इसे अमरत्व प्रदान करने के लिए यही पुस्तक माध्यम रह जाते हैं. इस कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार प्रसाद खंडेलवाल की ओर से महाकवि विद्यापति के 51 पदों का संग्रहित पुस्तक विद्यापति स्वरांजलि एवं पीजी संगीत विभाग की ओर से प्रकाशित शोध पत्रिका भैरवी के 10 वें अंक का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों के माध्यम से किया गया. अतिथियों का स्वागत करते हुए पीजी संगीत विभागाध्यक्ष डा. पुष्पम नारायण ने विद्यापति स्वरांजलि नामक पुस्तक के संदर्भ में जानकारी दी एवं कहा कि संगीत जगत एवं पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा. डा. नारायण ने विभाग की शोध पत्रिका भैरवी के संदर्भ में कहा कि इस शोध पत्रिका के कारण इस विभाग का परिचय पूरे देश स्तर पर है. कार्यक्रम को कुलानुशासक डा. अजय नाथ झा, पुस्तक के लेखक हरिद्वार प्रसाद खंडेलवाल आदि ने संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन डा. लावण्य कीर्त्ति सिंह काव्या ने किया.

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