नाबालिग लड़कियों से कराया जाता है नृत्य

Updated at : 04 Apr 2017 4:33 AM (IST)
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नाबालिग लड़कियों से कराया जाता है नृत्य

अनदेखी.नियमों को ताक पर रख संचालित होता है आर्केस्ट्रा अनुमंडल रक्सौल के साथ-साथ आदापुर, रामगढ़वा व छौड़ादानो में संचालित है सैकड़ों अवैध आर्केस्ट्रा किसी के पास नहीं है परमिशन, न कोई लाइसेंस नेपाल व बंगाल से लायी जाती हैं लड़कियां आर्केस्ट्रा की आड़ में देह व्यापार का भी चलता है काम रक्सौल : सीमाई अनुमंडल […]

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अनदेखी.नियमों को ताक पर रख संचालित होता है आर्केस्ट्रा

अनुमंडल रक्सौल के साथ-साथ आदापुर, रामगढ़वा व छौड़ादानो में संचालित है सैकड़ों अवैध आर्केस्ट्रा
किसी के पास नहीं है परमिशन, न कोई लाइसेंस
नेपाल व बंगाल से लायी जाती हैं लड़कियां
आर्केस्ट्रा की आड़ में देह व्यापार का भी चलता है काम
रक्सौल : सीमाई अनुमंडल में आर्केष्ट्रा संचालकों के द्वारा तमाम सरकारी नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार अनुमंडल के रक्सौल प्रखंड, आदापुर प्रखंड, छौड़दानो प्रखंड के साथ-साथ रामगढ़वा प्रखंड में मिलाकर 100 से अधिक आर्केष्ट्रा अवैध रूप से संचालित होता है. अपनी मजबूती के लिए यह लोग गिरोह बनाकर रहते हैं और गिरोह के माध्यम से आर्केष्ट्रा का संचालन करते हैं. इनमे एक भी आर्केष्ट्रा संचालक के पास किसी प्रकार की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं है.
हालांकि इनके जो कार्यालय हैं वे शहर से बाहर होते हैं. जहां पर लड़कियों को रखा जाता है. सूत्रों कि माने को आर्केष्ट्रा के नाम पर कुछ आर्केष्ट्रा संचालकों के द्वारा देह व्यापार का धंधा भी कराया जाता है. इसमें कुछ सफेदपोश लोगों का संरक्षण भी प्राप्त होता है.
नाबालिग लड़कियों से लिया जाता है काम : शादी-विवाह या किसी अन्य उत्सव के मौके पर इन आर्केष्ट्रा को जब बुलाया जाता है तो इसमें जो लड़कियां लायी जाती हैं. उनमें अधिकतर नाबालिग होती है.
सूत्रों का कहना है कि नेपाल के पहाड़ी जिलों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के इलाके से रक्सौल व इसके आसपास में संचालित आर्केष्टा में लड़कियां बुलायी जाती है. इसमें नाबालिग लड़कियों की संख्या अधिक होती है. बाल संरक्षण कानून के साथ-साथ इन आर्केष्ट्रा संचालकों के द्वारा तमाम कानून को धत्ता बताते हुए सरेआम बाजार में नाबालिग लड़कियो से डांस कराया जाता है. इसके बाद भी प्रशासन के द्वारा अब तक आर्केष्टा संचालकों को लेकर किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई नहीं की गयी है.
स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका भी शून्य : प्रशासन के साथ-साथ अब तक इस कुरीति पर लगाम लगाने के लिए स्वयं सेवी संगठन भी सामने नहीं आ रहे है. हालांकि पूर्व में कुछ मामले ऐसे सामने आये थे जिसमें नाबालिग लड़कियो को रेस्क्यू किया गया था. लेकिन हाल के दिनों में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले संगठन भी इसको लेकर कुछ सक्रिय नहीं दिख रहे हैं.
ग्रामीणों क्षेत्र में चलता है कार्यालय : अनुमंडल में सबसे अधिक अवैध आर्केष्ट्रा का संचालन ग्रामीण इलाकों में होता है. प्रशासन और समाज की नजर से बचने के लिए ये लोग ग्रामीण इलाके से सटे सरेह या किसी अनजान स्थान पर झोपड़ीनुमा दफ‍्तर बना कर रखते हैं. अपने पंपलेट व पोस्टर के माध्यम से लोग इन तक पहुंचते हैं और इसके बाद सौदा होता है. इसी की आड़ में देह व्यापार का भी धंधा चलता है.
शोषण का भी करते हैं काम : सूत्रों की माने तो जो लड़कियां बाहर से लायी जाती हैं.
आर्केष्ट्रा संचालकों के द्वारा उनका शोषण भी किया जाता है. दूर देश से बाहर आने के बाद लड़कियों को भी अपनी मजबूरीवश इनके शोषण का शिकार होना पड़ता है. इनको कम मेहनताना के साथ-साथ अच्छा खाना-पीना भी नहीं दिया जाता है. एक कोठरी में काम करनेवाली लड़कियों के जीवन को समेट कर रख दिया जाता है. इससे अंदाज लगाया जा सकता है आर्केष्ट्रा संचालक किस स्तर तक शोषण का कार्य करते हैं.
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