213 की हुई जांच, एक में भी रेप की पुष्टि नहीं

Updated at : 29 Jun 2016 5:20 AM (IST)
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213 की हुई जांच, एक में भी रेप की पुष्टि नहीं

मोतिहारी : जिले में बीते एक साल में रेप के 213 मामले सामने आये, जिनमें पीड़िता को जांच के लिए सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन, एक भी मामले में जांच टीम की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आयी. यानी यहां के डॉक्टरों ने एक भी मामले में रेप होने की पुष्टि नहीं की. इस रिपोर्ट पर अब […]

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मोतिहारी : जिले में बीते एक साल में रेप के 213 मामले सामने आये, जिनमें पीड़िता को जांच के लिए सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन, एक भी मामले में जांच टीम की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आयी. यानी यहां के डॉक्टरों ने एक भी मामले में रेप होने की पुष्टि नहीं की. इस रिपोर्ट पर अब सवाल उठने लगे हैं. वहीं, मामला सामने आने

213 की हुई
के बाद सदर
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े डॉक्टर बचाव की मुद्रा में आ गये हैं और संसाधनों का रोना रो रहे हैं. कह रहे हैं कि हमने सरकार को इसके बारे में लिखा है.
रमगढ़वा कांड के बहाने मोतिहारी सदर अस्पताल में दुष्कर्म मामलों की होनेवाली जांच रिपोर्ट की सच्चाई भी सामने आ गयी है. सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने पिछले एक साल में दुष्कर्म मामलों में जितनी भी जांच रिपोर्ट दी हैं. वो सवालों के घेरे में हैं. साल भर में 213 पीड़ित महिलाओं की जांच अस्पताल में की गयी है और किसी भी मामले में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई.
25 जून को जब राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू मोतिहारी में रामगढ़वा कांड की पीड़िता का हाल जानने आयी थीं, तो उन्होंने इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. साथ ही सीएस डॉ प्रशांत कुमार से साल भर में हुई जांचों का ब्योरा मांगा था. तब सीएस की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया था. इसको लेकर आयोग की सदस्य ने उस समय कड़ी आपत्ति व्यक्त की थी. उन्होंने सदर अस्पताल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया था. साथ ही कहा था कि आपको इसका जवाब देना पड़ेगा.
बॉक्स…
आरोपितों को मिला लाभ, जेल से छूटे
डॉक्टरी जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने की वजह से कई आरोपितों को इसका लाभ मिला है. पुलिस ने मामले में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने का लाभ उन्हें मिला और वो जेल से छूट गये. इसी साल पकड़ीदयाल इलाके में एक युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था, जिसमें पीड़ित पक्ष ने राज्य सरकार तक से गुहार लगायी थी. लेकिन मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने के कारण आरोपित जेल से छूट गया.
हम जांच में एक्सपर्ट नहीं.
सिविल सर्जन डॉ प्रशांत कुमार का कहना है कि हमारे यहां अस्पताल में फॉरेंसिक जांच एक्सपर्ट की टीम नहीं है. इस वजह से सूक्ष्म जांच में परेशानी होती है. इसको लेकर सरकार को लिखा गया है. वहीं, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शकुंतला सिंह का कहना है कि अस्पताल के लैब में अत्याधुनिक संसाधन नहीं होने के कारण जांच प्रभावित होती है. हम लोग मेडिकल जांच में एक्सपर्ट नहीं हैं. इसके लिए सरकार को लिखा गया है.
जांच को क्यों नहीं किया रेफर?
सदर अस्पताल प्रशासन के दुष्कर्म के मामलों में जांच की विशेषज्ञता व संसाधन नहीं होने का मामला भी तूल पकड़ने लगा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी मामले में जांच टीम को शंका थी, तो उसे पीड़िता को जांच के लिए रेफर करना चाहिए था, क्योंकि डॉक्टरी जांच पर ही उसका मामला टिका था. ऐसे में सही जांच रिपोर्ट नहीं होने पर आरोपित पक्ष को लाभ मिला और वो छूटने में सफल रहे. जबकि, पीड़िता को न्याय नहीं मिला. ये बड़ा अन्याय है.
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