बक्सर : जिस स्कूल से पढ़े डीसीपी, बदहाली देख किया कायाकल्प, जानें क्या-क्या दिया विद्यालय को
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Feb 2019 6:14 AM
नावानगर (बक्सर) : नावानगर प्रखंड के मध्य विद्यालय वैना से पढ़ाई कर एक छात्र ने जब मुकाम हासिल किया तो वह स्कूल की व्यवस्था को संवारने दोबारा गांव पहुंचा. उसने न केवल स्कूल को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के योग्य बनाया. स्कूल को 100 बेंच, 10 से अधिक कुुर्सियां, कंप्यूटर, प्रयोगशाला […]
नावानगर (बक्सर) : नावानगर प्रखंड के मध्य विद्यालय वैना से पढ़ाई कर एक छात्र ने जब मुकाम हासिल किया तो वह स्कूल की व्यवस्था को संवारने दोबारा गांव पहुंचा.
उसने न केवल स्कूल को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के योग्य बनाया. स्कूल को 100 बेंच, 10 से अधिक कुुर्सियां, कंप्यूटर, प्रयोगशाला किट समेत पांच लाख से अधिक के संसाधन उपलब्ध कराये हैं.
हम बात कर रहे हैं प्रखंड के वैना गांव निवासी स्व राम चीज चौधरी के पुत्र आइपीएस डॉ विपिन बिहारी चौधरी की, जिनकी पहल से स्कूल का कायाकल्प हुआ है. बता दें इसी स्कूल से विपिन बिहारी ने सातवीं तक की पढ़ाई की. जब वह गांव आये तो उन्होंने देखा कि स्कूल में एक से छठवीं क्लास तक के बच्चे आज भी बोरी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं. भवन का निर्माण तो हो गया पर स्कूल में बच्चों के पठन-पाठन के लिए अत्याधुनिक संसाधनों की कमी थी. उनकी पहल से अब बच्चे बेंच पर बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे.
डीसीपी डाॅ विपिन बिहारी ने बताया कि इस विद्यालय के शिक्षकों की तालीम की ही देन है कि मैं एमबीबीएस करने के बाद आइपीएस बन सका. ये सब सामान देकर भी मैं इस विद्यालय का कर्ज नहीं चुका सकता.
स्कूल के प्रधानाध्यापक श्रीराम सिंह ने कहा कि डॉ विपिन बिहारी की ओर से किया गया योगदान काफी सराहनीय है. इससे निश्चित रूप से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में लोगों को मदद मिलेगी.
नावानगर मध्य विद्यालय से की थी सातवीं तक पढ़ाई
अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए डॉ बिपिन बिहारी बताते हैं कि पहले हम लोग भी बोरी पर ही पढ़ाई करते थे. स्कूल के शिक्षकों ने मुझे आगे बढ़ाने में काफी योगदान दिया. वे कहते हैं कि स्कूल के दिनों में शिक्षक अक्षयवट मिश्रा और रणजीत उपाध्याय का काफी अहम योगदान रहा.
उन्होंने बताया कि जब स्कूल की स्थिति के बारे में पता चला तो मैंने एक छोटी सी मदद स्कूल को की है. उनके इस योगदान की चर्चा पूरे इलाके में काफी जोरों पर है. उन्होंने मध्य विद्यालय वैना से 1977 में सातवीं कक्षा पास की. 1995 में आइपीएस बने. वर्तमान में वह दिल्ली में डीसीपी के पद पर कार्यरत है.
क्या-क्या विद्यालय को दिया
100 बेंच, पचास हजार की कुर्सी, तीस हजार की टेबल, बीस हजार की विज्ञान किट, पांच हजार के महापुरुषों एवं वैज्ञानिकों के फोटो समेत जीवनी, लॉउडस्पीकर सेट, कंप्यूटर समेत कई सामान को विद्यालय को प्रदान किये गये.
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