खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस

Updated at : 28 Jun 2017 8:24 AM (IST)
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खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस

नलकूपों के बंद होने से किसानों की बढ़ी चिंता नहीं हो पा रहा पटवन पटवन के लिए मजबूर होकर निजी ट्यूबवेल का सहारा ले रहे है किसान बक्सर : खरीफ मौसम आते ही किसान बिजड़ा डालने की तैयारी शुरू कर देते है. इस मौसम में बिजड़ा डालने के लिए पानी की जरूरत होती है. पूर्व […]

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नलकूपों के बंद होने से किसानों की बढ़ी चिंता नहीं हो पा रहा पटवन

पटवन के लिए मजबूर होकर निजी ट्यूबवेल का सहारा ले रहे है किसान

बक्सर : खरीफ मौसम आते ही किसान बिजड़ा डालने की तैयारी शुरू कर देते है. इस मौसम में बिजड़ा डालने के लिए पानी की जरूरत होती है. पूर्व में किसान बारिश के मौसम पर पूरी तरह से निर्भर रहते थे. समय पर बारिश नहीं होने से खेती पर असर पड़ने लगा. इस बात को ध्यान रखते हुए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप लगाया. ताकि किसानों के खेतों तक पानी पहुंच जाये.

लेकिन, वर्तमान समय में जिले में लगे आधा से अधिक नलकूप खराब होने के कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में किसान अन्य माध्यमों से अपने खेतों में पटवन कर रहे है. जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है. साथ ही बिजड़ा डालने में भी देरी हो रही है. ऐसे में किसान मजबूर होकर निजी ट्यूबवेल का सहारा ले रहे है. ताकि अपने खेतों में हरियाली ला सके. इसके लिए किसानों का अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. साथ ही विभाग में नलकूप ऑपरेटर की भी भारी कमी है. जिससे चालू नलकूप भी कभी-कभार चल पाता है.

दो सौ में महज 56 नलकूप है चालू: जिले में राजकीय नलकूपों की संख्या दो सौ है. इसमें से महज 56 नलकूप ही चालू हालत है. लघु सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यांत्रिक दोष के कारण पांच व विद्युत दोष के कारण दो नलकूप बंद पड़े है. जबकि यांत्रिक व विद्युत दोष के कारण 83 नलकूप बंद पड़े हुए है. जबकि 54 नलकूप ऐसे है, जो कि किसी भी परिस्थितियों में शुरू नहीं किया जा सकता है. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंद पड़े राजकीय नलकूपों की मरम्मत के लिए साढ़े चौदह करोड़ का प्राक्कलन भेजा गया है.

ताकि इनकी मरम्मत कर शुरू किया जा सके. साथ ही विभाग में नलकूप ऑपरेटरों में भारी कमी है. चालू 56 नलकूपों को चलाने के लिए महज 12 ऑपरेटर है. ऐसे में एक ऑपरेटर आठ से नौ नलकूपों का संचालन करते है. जिससे एक नलकूप पर ऑपरेटर काफी कम समय दे पाते है. इससे सिंचाई पर बूरा असर पड़ता है.फेज-8 के नलकूपों को दुरुस्त करने का प्रयास: जिले में फेज आठ के तहत 48 नलकूप कार्यरत है.

जिसमें 38 नलकूप चालू हालत में है. यांत्रिक दोष के कारण एक, विद्युत गड़बड़ी के कारण तीन, विद्युत व यांत्रिक दोष के कारण तीन व अन्य कारणों से चार नलकूप बंद पड़े है. वहीं नाबार्ड फेज-11 की ओर से 92 नलकूप लगाये गये हैं. जिसमें 70 कार्यरत है. वहीं यांत्रिक कारण से सात, विद्युत कारण से चार, यांत्रिक व विद्युत कारण से आठ तथा अन्य दोष से तीन नलकूप बंद पड़े हुए है. नाबार्ड फेज-4 के तहत जिले में चार नलकूप लगे हुए है.

जिसमें डुमरांव, बासुदेवा व चौगाई के नलकूप चालू हालत है. जबकि एक बंद पड़ा हुआ है. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजकीय नलकूपों को छोड़कर अन्य नलकूपों को समितियों के हवाले कर दिया गया है. समितियां भी देखरेख करते हुए पटवन करती है.

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