श्रद्धालुओं ने लगायी गंगा में डुबकी

Updated at : 06 Jun 2017 3:42 AM (IST)
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श्रद्धालुओं ने लगायी गंगा में डुबकी

ज्येष्ठ एकादशी को गंगा में स्नान व दान से मिलती है पूरे साल के 24 एकादशी का फल बक्सर : निर्जला एकादशी व्रत को लेकर अहले सुबह ही श्रद्धालुओं की हजारों में भीड़ जुट गयी थी. सुबह ही श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पहुंच स्नान दान करने शुरू कर दिये थे. ज्येष्ठ की एकादशी व्रत […]

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ज्येष्ठ एकादशी को गंगा में स्नान व दान से मिलती है पूरे साल के 24 एकादशी का फल

बक्सर : निर्जला एकादशी व्रत को लेकर अहले सुबह ही श्रद्धालुओं की हजारों में भीड़ जुट गयी थी. सुबह ही श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पहुंच स्नान दान करने शुरू कर दिये थे. ज्येष्ठ की एकादशी व्रत करने के लिए कुछ श्रद्धालु गंगा दशहरा स्नान के बाद धर्मशालाओं एवं मठ मंदिरों में अपना डेरा जमाये हुए थे. आधी रात के बाद श्रद्धालुओं ने स्नान करना शुरू कर दिया. रामरेखा घाट पर हजारों लोगों में गंगा में आस्था की डुबकी लगायी. पूरे दिन एकादशी व्रत को लेकर स्नान करने की शिलसिला जारी रहा.
अहले सुबह स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजन करने के बाद ब्राह्मणों को कलश में जल, हाथ का पंखा, फल समेत अन्न एवं मिष्ठान दान किये. निर्जला एकादशी व्रत को करनेवाले श्रद्धालु को साल के कुल एकादशी व्रत का फल प्राप्त हो जाता है. शुभ दिन होने के कारण मुंडन संस्कार के लिए भी काफी संख्या में लोग पहुंचे. स्नान व मुंडन संस्कार एक साथ होने के कारण वीर कुंवर सिंह चौक से रामरेखाघाट तक पैदल चलने के लिए भी जगह नहीं थी.
क्या है निर्जला एकादशी व्रत : निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है. साधारणतः निर्जला एकादशी का व्रत गंगा दशहरा के अगले दिन पड़ता है, लेकिन कभी-कभी साल में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी दोनों एक ही दिन पड़ जाते हैं. व्रतों में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे ज्यादा कठिन माना जाता है. वर्ष में एक बार ग्रीष्म ऋतु के घोर तपते दिनों में किया जानेवाला उपवास, जिसमें पानी भी नहीं पिया जाता है. इस एकादशी पर व्रत करने से वर्ष की 24 एकादशियों के व्रत के समान फल मिलता है.
निर्जला एकादशी में स्नान-दान का महत्व : पद्म पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल एकादशी को अर्थात निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी तीर्थों में स्नान के समान पुण्य मिलता है. इस दिन जो व्यक्ति दान करता है वह सभी पापों का नाश करते हुए परमपद प्राप्त करता है. इस दिन अन्न, वस्त्र, जौ, गाय, जल, छाता, जूता आदि का दान देना शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, फिर गौदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान्न व दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए.
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