जमीन की रजिस्ट्री हुई ऑनलाइन तो क्यों घट गई रफ्तार? राजगीर में सिर्फ 3 निबंधन, डीड राइटरों का काम भी प्रभावित
सांकेतिक तस्वीर
राजगीर, हिलसा और बिहारशरीफ में नई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी हो गई है. इस नई डिजिटल प्रक्रिया को समझने में लोगों को शुरुआती परेशानी हो रही है, वहीं डीड राइटरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है.
Paperless Registration Rajgir : अवर निबंधन कार्यालयों में लागू की गयी पेपरलेस निबंधन व्यवस्था ने प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन शुरुआती दौर में इसका असर रजिस्ट्री की रफ्तार पर साफ दिखाई देने लगा है.
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क्योंकि राजगीर, हिलसा और बिहारशरीफ अवर निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक रजिस्ट्री के आंकड़े काफी कम रहे हैं.
विभिन्न कार्यालयों में ऑनलाइन निबंधन के आंकड़े
हिलसा में सबसे अधिक 10, बिहारशरीफ में आठ और राजगीर में महज तीन ऑनलाइन निबंधन हुए हैं, जबकि राजगीर अवर निबंधन कार्यालय में यह व्यवस्था 17 अगस्त से लागू की गयी है और हिलसा तथा बिहारशरीफ में तीन अगस्त से ही पेपरलेस निबंधन शुरू हो चुका है.
नई ऑनलाइन प्रक्रिया और लोगों को आ रही शुरुआती परेशानी
नयी व्यवस्था के तहत संपत्ति निबंधन की पूरी प्रक्रिया को कागजरहित और ऑनलाइन किया गया है जिसका उद्देश्य इसे सरल व पारदर्शी बनाना है.
हालांकि शुरुआती दिनों में लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया समझने में परेशानी हो रही है और वे कार्यालय पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं तथा तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं.
डिजिटल रिकॉर्ड से सुरक्षा और अधिकारियों के बयान
राजगीर के अवर निबंधन पदाधिकारी ओंकार ने बताया कि पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया काफी आसान है और इससे जालसाजी की संभावना कम हो जाती है तथा दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रहने से कागजी कार्रवाई कम होगी और भविष्य में कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे.
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डीड राइटरों के पारंपरिक काम पर संकट
दूसरी ओर पेपरलेस व्यवस्था से दस्तावेज नवीश (डीड राइटर) भी प्रभावित हुए हैं क्योंकि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से उनका पारंपरिक काम लगभग ठप हो गया है, जिससे राजगीर के 40 डीड राइटरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है जबकि पहले जहां करीब 50 निबंधन नियमित होते थे.
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