बिहार में अब नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा, दाखिल खारिज में सरकारी जमीन की होगी अनिवार्य जांच

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जमीन की सरकारी न्यूनतम कीमत बढ़ी (सांकेतिक तस्वीर)

Bihar Bhumi: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी डीएम को निर्देश दिया है. आदेश के मुताबिक, दाखिल-खारिज के हर मामले में सरकारी जमीन की अनिवार्य जांच की जाए. इस कदम का उद्देश्य गलत एंट्री रोकना, सरकारी जमीन की सुरक्षा बढ़ाना और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना है.

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पटना से कृष्ण कुमार की रिपोर्ट
Bihar Bhumi:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य में सरकारी जमीन की सुरक्षा और राजस्व अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी डीएम को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. विभाग ने कहा है कि दाखिल खारिज के हर एक मामले में सरकारी जमीन वाली जमाबंदियों की अनिवार्य रूप से जांच और मिलान किया जाएगा.

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विभाग की समीक्षा समीक्षा में पाया गया है कि कई अंचलों में दाखिल-खारिज के समाधान के दौरान बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी जमीन की सूची का मिलान नहीं किया जा रहा है. इससे सरकारी जमीन की गलत जमाबंदी कायम होने की आशंका बनी रहती है.

सभी डीएम को दिया ये आदेश

विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अंचल अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करें. साथ ही हर एक दाखिल-खारिज आवेदन के निष्पादन से पहले सरकारी जमीन संबंधी एंट्री की जांच सुनिश्चित कराएं. माना जा रहा है कि इस पहल से सरकारी जमीन पर अवैध दावों पर अंकुश लगेगा. साथ ही राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी.

जिलाधिकारी को मिला ये पावर

सरकारी जमीन के इंटर डिपार्टमेंटल फ्री ट्रांसफर की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब 10 एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम भूमि के इंटर डिपार्टमेंटल फ्री ट्रांसफर की शक्ति जिलाधिकारियों को दे दी गई है.

इसके साथ ही 10 से 20 एकड़ तक जमीन हस्तांतरण का अधिकार प्रमंडलीय आयुक्तों को मिलेगा. 20 एकड़ से अधिक जमीन के हस्तांतरण के लिए मंत्रिपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है.

विभाग के सचिव ने दिया निर्देश

विभाग के सचिव जय सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के दौरान यह फैक्ट सामने आया था कि छोटे और जनहित की परियोजनाओं के लिए जमीन हस्तांतरण की वर्तमान प्रक्रिया में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है. इससे विकास योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा था. इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले से दी हुई शक्तियों का रिविजन किया है.

साल 2014 में अधिकारियों की कम थी सीमा

साल 2014 के प्रावधान के अनुसार तीन एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन के निःशुल्क हस्तांतरण की शक्ति जिलाधिकारी को थी. तीन से पांच एकड़ तक भूमि हस्तांतरण की शक्ति प्रमंडलीय आयुक्त को प्राप्त थी. नये आदेश के बाद इन सीमाओं में बढ़ोतरी की गई है. विभाग का मानना है कि इससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और अन्य जनहित की परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होगी.

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