भारतीय संस्कृति गौरवशाली : डॉ साहा

Published at :02 Dec 2016 5:04 AM (IST)
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भारतीय संस्कृति गौरवशाली : डॉ साहा

भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान’ विषय पर सेमिनार आयोजित आरा : वीर कुंवर सिंह विवि की स्थापना के रजत जयंती पर वार्षिक कार्यक्रम के तहत पीजी प्राकृत एवं जैन शास्त्र विभाग में डॉ नेमी चंद्र शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला द्वारा ‘भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, […]

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भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान’ विषय पर सेमिनार आयोजित

आरा : वीर कुंवर सिंह विवि की स्थापना के रजत जयंती पर वार्षिक कार्यक्रम के तहत पीजी प्राकृत एवं जैन शास्त्र विभाग में डॉ नेमी चंद्र शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला द्वारा ‘भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन कुलपति डॉ लीलाचंद साहा ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ विश्वनाथ चौधरी ने की. मुख्य अतिथि पूर्व सांसद एवं पूर्व कुलपति जैन विश्व भारती लाडनू, राजस्थान के डॉ रामजी सिंह,
विशिष्ट अतिथि डॉ सीडी राय एवं फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ कन्हैया बहादुर सिन्हा थे. कुलपति डॉ साहा ने जैन विश्व भारती के पूर्व कुलपति की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ रामजी सिंह स्वयं अपने आप में संस्कृति है. इनका जीवन हमलोगों के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति अत्यंत गौरवशाली एवं समृद्धशाली है. भारत की संस्कृति को समृद्ध एवं वैभवशाली बनाने में जैन धर्म का विशेष योगदान है. मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता डॉ रामजी सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति संस्कृतियों की जन्मदातृ है. भारत में तीन प्रजातियां हैं- मंगोल, द्रविड़ एवं आर्य. जैन धर्म का अनेकांतवाद, स्यादवाद, अहिंसा का सिद्धांत बेजोड़ है. स्यादवाद सिद्धांत से दुनिया के समस्त झगड़े समाप्त हो सकते हैं. हिंसा का परिणाम महाभारत है. सभी अशांतियों को समाप्त करने के लिए जैन धर्म के सारे सिद्धांत कारगर होंगे. उन्होंने कहा कि जैन धर्म का सिद्धांत अपरिग्रह केवल हिंसा रोकने के लिए ही नहीं, अपितु पर्यावरण रक्षा के लिए भी अपरिग्रह आवश्यक है. भगवान महावीर को हुए लगभग 3000 वर्ष हुए. लेकिन आज भी उनका दर्शन प्रासंगिक बना हुआ है. डॉ विश्वनाथ चौधरी ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया. डॉ कन्हैया बहादुर सिन्हा ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया. मंच का संचालन डॉ दूधनाथ चौधरी ने किया. मौके पर डॉ उमाशंकर पांडेय, डॉ पशुपति सिंह, डॉ महेश सिंह, डॉ राघवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ योगेंद्र पाठक, डॉ रवींद्र नाथ राय, डॉ अरुण, डॉ श्री प्रकाश राय, सुशील कुमार, देवाश्रय प्रसाद सिंह, कुमार अविनाश, मुरारी पांडेय आदि उपस्थित थे.
अशांती को समाप्त करने के लिए जैन धर्म के सिद्धांत कारगर
अन्य संस्कृतियों की जन्मदातृ है भारतीय संस्कृति : डॉ रामजी
भारतीय संस्कृति को समृद्ध एवं वैभवशाली बनाने में जैन धर्म का विशेष योगदान
वीर कुंवर सिंह विवि में आयोजित सेमिनार में उपस्थित लोग.
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