TMBU: अधिक वेतन भुगतान के खेल पर बड़ा एक्शन! 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित; 365 कर्मियों की फाइलों की होगी जांच
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय | Prabhat Khabar Network
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. इस मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है. कमेटी को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में निर्धारित वेतन से अधिक भुगतान लेने के गंभीर आरोपों की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है. 21 अगस्त को आयोजित ऑनलाइन सिंडिकेट बैठक में लिए गए कड़े फैसले के आधार पर पूर्व में गठित समिति में संशोधन कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने नवगठित कमेटी को वेतन भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है. इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
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9 सदस्यीय नई जांच कमेटी में ये हैं शामिल
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कमेटी में वरिष्ठ पदाधिकारियों और सिंडिकेट सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है:
- सिंडिकेट सदस्य: डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. मुश्फिक आलम और मुकेश कुमार को सदस्य बनाया गया है.
- अधिकारी व प्रोफेसर: छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) प्रो. अर्चना कुमारी साह, महाविद्यालय निरीक्षक प्रो. सुरेंद्र सिंह, प्रो. पवन कुमार सिन्हा, वित्त पदाधिकारी ब्रज किशोर प्रसाद तथा बजट पदाधिकारी डॉ. एएन सहाय शामिल हैं.
- संयोजक: रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे को सदस्य-सह-संयोजक बनाया गया है.
शिक्षा विभाग का कड़ा पत्र: पूर्व रजिस्ट्रार की शिकायत पर संज्ञान
वेतन भुगतान में हो रही वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बिहार शिक्षा विभाग ने भी कड़ा रुख अपनाया है:
- विभाग का निर्देश: उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर वेतन भुगतान में चल रही गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाने और नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है.
- पूर्व रजिस्ट्रार का पत्र: शिक्षा विभाग के पत्र में टीएमबीयू के पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. विकास चंद्र द्वारा भेजी गई उस शिकायत का भी विशेष उल्लेख किया गया है, जिसमें एलडीसी (LDC) स्तर के कर्मचारियों द्वारा गलत तरीके से अधिक वेतन उठाने की बात कही गई थी.
21 अगस्त की सिंडिकेट बैठक में प्रभारी VC ने लिया एक्शन
प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा की अध्यक्षता में हुई 21 अगस्त की बैठक में यह मामला प्रमुखता से उठा था:
- वेतन सत्यापन में खेल: बैठक में तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय के कुछ क्लर्क गलत तरीके से वेतन सत्यापन कोषांग से अपना वेतन निर्धारित करवाकर वर्षों से अतिरिक्त राशि का भुगतान ले रहे हैं.
365 कर्मचारियों की फाइलें और हटाए गए SO भी जांच के घेरे में
जांच का दायरा केवल शिकायतों तक सीमित न रहकर काफी व्यापक होने वाला है:
- 365 कर्मियों के दस्तावेज: विवि सूत्रों के अनुसार, 20 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त हुए करीब 365 कर्मचारियों के वेतन से जुड़े सेवा इतिहास और दस्तावेजों की भी जांच होगी.
- स्थापना शाखा के पूर्व SO: स्थापना शाखा के पद से हाल ही में हटाए गए पूर्व एसओ सर्वानंद प्रसाद की भूमिका की भी जांच की जाएगी. ज्ञात हो कि सिंडिकेट के निर्णय में कथित छेड़छाड़ के आरोप के बाद प्रभारी कुलपति ने उन्हें पद से हटाकर स्थापना शाखा कार्यालय को सील करवा दिया था.
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