राघोपुर में थमा कटाव का कहर, लेकिन खतरा बरकरार, रेलवे लाइन बचाने में जुटा प्रशासन

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फोटो- गोपालपुर जहाज से फ्लड फायटिंग करते हुए | Prabhat Khabar Network

राघोपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे तटबंध और रेलवे लाइन पर खतरा मंडरा रहा है. हालांकि कटाव की रफ्तार फिलहाल थमी है, लेकिन प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिया है.

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भागलपुर, गोपालपुर. गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और पिछले कई दिनों से जारी भीषण कटाव के बाद राघोपुर में फिलहाल कटाव की रफ्तार कुछ थमती दिख रही है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. गुरुवार सुबह से राघोपुर पंचायत में कटाव लगभग नगण्य रहने की सूचना है. इसके बावजूद गंगा की मुख्य धारा तटबंध के बेहद करीब पहुंच चुकी है और जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. शुक्रवार सुबह नदी का जलस्तर 33.50 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 33.68 मीटर से महज 18 सेंटीमीटर नीचे है. ऐसे में प्रशासन और जल संसाधन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती बची जमीन और पीछे से गुजर रही महत्वपूर्ण रेलवे लाइन को सुरक्षित रखना है. बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और अधिकारी मौके पर कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं.

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खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे पहुंची गंगा

राघोपुर में शुक्रवार सुबह गंगा का जलस्तर 33.50 मीटर दर्ज किया गया. पिछले 12 घंटे में जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है. नदी का पानी तटबंध के टो तक पहुंच गया है. जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि होने पर तटबंध पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है.

250 मीटर तटबंध गंगा में समाने के बाद बढ़ी चुनौती

राघोपुर-काजीकोरैया क्षेत्र में भीषण कटाव के दौरान करीब 250 मीटर तटबंध गंगा में समा चुका है. कटाव स्थल पर कई जगह गहरी खाई बन गयी है. अब नदी की धारा के सामने बची जमीन और उसके पीछे मौजूद रेलवे लाइन की सुरक्षा प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गयी है. बताया जा रहा है कि गंगा की मुख्य गहरी धारा का रुख भी बदल गया है. पहले मुख्य धारा तटबंध से काफी दूरी पर थी, लेकिन अब करीब 35 से 40 मीटर गहरी धारा तटबंध के बेहद करीब आ गयी है. इससे नदी ऊपर से ही नहीं, बल्कि नीचे से भी जमीन काट रही है. यही वजह है कि कटावरोधी कार्य के दौरान डाली जा रही सुरक्षा सामग्री पर भी नदी का लगातार दबाव बना हुआ है.

जहाज से नदी में डाली जा रही बालू की बोरियां

कटाव को नियंत्रित करने के लिए नदी के रास्ते जहाज से बालू भरी बोरियां तटबंध के किनारे गिरायी जा रही हैं. रात-दिन बचाव कार्य जारी है. आरसीडी मंत्री सह स्थानीय विधायक कुमार शैलेंद्र, जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख वरुण कुमार और मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान समेत कई अधिकारी राघोपुर में कैंप कर रहे हैं. जिला प्रशासन की ओर से भी बड़े पैमाने पर संसाधन लगाये गये हैं. प्रशासन के अनुसार क्षतिग्रस्त स्थल पर 2,800 मेगा जियोबैग और 1.25 लाख बालू भरे बोरे उपलब्ध कराये गये हैं. इसके अलावा दो लाख अतिरिक्त बोरे आसपास के प्रमंडलों से भेजे जा रहे हैं. बचाव कार्य में ट्रैक्टर, पोकलेन, जेसीबी, नाव और बड़ी संख्या में मजदूर लगाये गये हैं.

रेलवे लाइन की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता

कटाव का रुख अब पीछे से गुजर रही रेलवे लाइन की ओर होने के कारण चिंता और बढ़ गयी है. यदि नदी का दबाव इसी तरह बना रहा और कटाव दोबारा तेज हुआ तो रेलवे लाइन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. यही कारण है कि बचाव कार्य में तटबंध के साथ रेलवे लाइन को सुरक्षित रखने को भी प्राथमिकता दी जा रही है. प्रशासन और अभियंताओं की नजर कटाव की हर गतिविधि पर बनी हुई है. नदी की मुख्य धारा के तटबंध के करीब पहुंचने के कारण मामूली बदलाव पर भी स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है.

घर-द्वार छोड़ सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे परिवार

कटाव और बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ा दी है. राघोपुर और आसपास के गांवों से परिवार अपने घर और सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं. कई परिवार किराये के कमरे लेकर रहने को मजबूर हैं. शंकरपुर और छोटी अलालपुर के करीब 14 परिवारों के किराये पर रहने की रिपोर्ट सामने आयी है. ग्रामीणों का कहना है कि कटाव ने उनके सामने दोबारा विस्थापन का संकट खड़ा कर दिया है. जिन परिवारों ने वर्षों पहले भी गंगा के कटाव में अपना घर और जमीन गंवायी थी, उन्हें एक बार फिर उसी संकट का सामना करना पड़ रहा है.

पांच गांवों के 5,011 लोग प्रभावित

जिला प्रशासन के अनुसार राघोपुर पंचायत के पांच गांवों में 1,005 परिवार और 5,011 लोग प्रभावित हैं. प्रभावित क्षेत्र में सामुदायिक रसोई भी चलायी जा रही है. प्रशासन के अनुसार 24 अगस्त से अब तक सामुदायिक रसोई के माध्यम से 62,698 आपदा पीड़ितों को भोजन कराया जा चुका है. एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किया गया है. प्रशासन ने लोगों से प्रभावित इलाकों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की है.

कटाव थमा, लेकिन अगले एक-दो दिन बेहद महत्वपूर्ण

राघोपुर में फिलहाल कटाव की रफ्तार कम होना राहत की बात जरूर है, लेकिन इसे खतरे का अंत नहीं माना जा सकता. नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और खतरे के निशान से महज 18 सेंटीमीटर नीचे है. मुख्य धारा के तटबंध के करीब आने से नीचे से कटिंग का खतरा भी बना हुआ है. ऐसे में राघोपुर के लिए आने वाले एक-दो दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है. एक ओर बढ़ती गंगा के दबाव को कम करना है, तो दूसरी ओर बची हुई जमीन और महत्वपूर्ण रेलवे लाइन को कटाव से सुरक्षित रखना है.

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