ब्रह्मोत्तर बांध पर बाढ़ का पानी देख मची हलचल, मंत्री से पूर्व सांसद तक पहुंचे, देर रात ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

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ब्रह्मोत्तर बांध का निरीक्षण करते नेता व अधिकारी

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गंगा-कोसी क्षेत्र में बाढ़ के दबाव के बीच ब्रह्मोत्तर बांध की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है. स्थानीय विधायक और ऊर्जा मंत्री ने बांध का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव कार्य में जुटने के निर्देश दिए. विभिन्न दलों के नेता भी पहुंचे. ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ीं.

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Brahmottar Bandh Flood: गंगा और कोसी क्षेत्र में बाढ़ के दबाव के बीच ब्रह्मोत्तर बांध की स्थिति ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है. सोमवार को स्थानीय विधायक सह ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने बांध और आसपास के बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया. उन्होंने जल संसाधन विभाग के अभियंता को हर हाल में ब्रह्मोत्तर बांध को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.

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ऊर्जा मंत्री ने मौके पर मौजूद सीओ को भी बाढ़ पीड़ितों तक तत्काल राहत पहुंचाने का निर्देश दिया. यानी एक तरफ बांध को बचाने के लिए बचाव कार्य पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ पानी से प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गयी.

बांध पर दिनभर पहुंचते रहे नेता

ब्रह्मोत्तर बांध की स्थिति को लेकर सोमवार को राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहीं. पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल यादव ने नाव से बांध का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बांध की सुरक्षा और जरूरी बचाव कार्य किये जाते, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती.

अनिल यादव ने सीओ और जल संसाधन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना था कि बांध की सुरक्षा को लेकर समय पर जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए थे.

कांग्रेस नेता शीतल प्रसाद सिंह निषाद ने भी ब्रह्मोत्तर बांध का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाया. इस तरह सोमवार को बांध सिर्फ बाढ़ के पानी के दबाव को लेकर ही चर्चा में नहीं रहा, बल्कि राहत और बचाव कार्य को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल उठते रहे.

ग्रामीण बोले, पानी लगातार फैल रहा है

बांध के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की चिंता सबसे ज्यादा पानी के लगातार फैलने को लेकर है. ग्रामीणों ने बताया कि पानी का फैलाव जारी है और यदि समय रहते मजबूत कार्रवाई नहीं की गयी, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

बाढ़ की स्थिति में बांध की सुरक्षा सीधे आसपास के गांवों से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि स्थानीय लोग भी प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई पर नजर बनाये हुए हैं.

ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांध को सुरक्षित रखने के लिए बचाव कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और पानी के दबाव को देखते हुए आगे क्या कदम उठाये जाते हैं.

अधिकारियों ने मौके पर करायी बचाव की कार्रवाई

ब्रह्मोत्तर बांध पर बाढ़ का दबाव बढ़ने की सूचना के बाद सोमवार को अधिकारियों की टीम भी मौके पर पहुंची. नवगछिया के नवपदस्थापित आइएएस एसडीओ के परीक्षित, बीडीओ कुंदन कुमार और सीओ रौशन कुमार समेत अन्य अधिकारियों ने बांध की स्थिति का निरीक्षण किया.

अधिकारियों ने मौके पर अपनी मौजूदगी में बचाव कार्य भी कराया. उन्होंने जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता ई नयन कुमार को युद्धस्तर पर काम करने का निर्देश दिया.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बांध की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए. इससे संकेत है कि प्रशासन फिलहाल बांध को सुरक्षित रखने और बाढ़ के बढ़ते दबाव से निपटने को प्राथमिकता दे रहा है.

देर रात तक ग्रामीणों ने भी संभाला मोर्चा

ब्रह्मोत्तर बांध को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी केवल अधिकारियों और विभागीय कर्मियों तक सीमित नहीं रही. सैदपुर के दर्जनों ग्रामीण देर रात तक बचाव कार्य में जुटे रहे.

अधिवक्ता मुकेश कुमार, नितेन्द्र सिंह उर्फ गुलाबी सिंह, रौशन राय, पवन कुंवर, प्रभाष कुंवर, पवन सिंह, सरुण कुमार सहित कई ग्रामीण जल संसाधन विभाग के कर्मियों के साथ मिलकर बांध बचाने के काम में लगे रहे.

बाढ़ के बीच ग्रामीणों की यह सक्रियता बताती है कि बांध की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर कितनी चिंता बनी हुई है. प्रशासनिक टीम के साथ ग्रामीणों का जुटना तत्काल बचाव कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा.

Brahmottar Bandh Flood: अब आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर

ब्रह्मोत्तर बांध पर सोमवार को नेताओं से लेकर अधिकारियों और ग्रामीणों तक की सक्रियता के बाद अब लोगों की नजर आगे की स्थिति पर है. पानी का दबाव बना रहता है या कम होता है, बचाव कार्य कितनी तेजी से चलता है और बांध को कितना सुरक्षित रखा जा पाता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा.

फिलहाल प्रशासन ने बांध को सुरक्षित रखने के लिए युद्धस्तर पर काम करने का निर्देश दिया है. वहीं बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के लिए भी सीओ को निर्देशित किया गया है. दूसरी ओर ग्रामीणों की मांग और चिंता यही है कि बचाव कार्य में किसी तरह की देरी न हो, क्योंकि पानी लगातार फैलने की स्थिति में आसपास के गांवों पर इसका असर बढ़ सकता है.

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